Trump-Netanyahu में हुई मीटिंग, ईरान पर बनी क्या सीक्रेट रणनीति?

मीटिंग के बाद ट्रंप सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्रथ सोशल पर लिखते हैं कि फिलहाल हम किसी फैसले पर नहीं पहुंचे हैं। लेकिन मैंने इस बात पर जोर दिया है कि ईरान के साथ बातचीत जारी रखनी चाहिए ताकि यह देखा जा सके कि कोई समझौता हो सकता है या नहीं। ट्रंप आगे लिखते हैं मैंने पीएम को साफ कर दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजमीन नेतन याू के बीच करीब 3 घंटे बैठक चली है। इसमें ईरान के मुद्दे पर बातचीत की गई लेकिन अंतिम समझौता नहीं हुआ। ट्रंप ने कहा कि बातचीत अच्छी रही। हालांकि कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। इस बैठक में ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत जारी रखने पर जोर दिया है ताकि देखा जा सके समझौता हो सकता है या नहीं। मीटिंग के बाद ट्रंप सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्रथ सोशल पर लिखते हैं कि फिलहाल हम किसी फैसले पर नहीं पहुंचे हैं। लेकिन मैंने इस बात पर जोर दिया है कि ईरान के साथ बातचीत जारी रखनी चाहिए ताकि यह देखा जा सके कि कोई समझौता हो सकता है या नहीं। ट्रंप आगे लिखते हैं मैंने पीएम को साफ कर दिया है।
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पीएम ने तन्याहू को साफ कर दिया है कि अगर समझौता हो जाए तो बेहतर है। अगर नहीं होता है तो हम सब उसका अंजाम देखेंगे। पिछली बार जब ईरान नहीं माना था तो उनके खिलाफ ऑपरेशन मिडनाइट हैमर चलाया गया जो उनके लिए बहुत बुरा साबित हुआ। उम्मीद है कि इस बार वह समझदारी दिखाएंगे। इसके अलावा हमने गजा और उसके आसपास के इलाके में शांति प्रयासों पर भी बात की। वाकई मिडिल ईस्ट में अब शांति है। ऐसा ट्रंप का दावा है। मिडिल ईस्ट में शांति का दावा करने वाले अमेरिका और ईरान के बीच काफी दिनों से तनाव बना हुआ है। अगर ईरान ट्रंप की डिमांड को ठुकराता है तो जंग की पूरी-पूरी आशंका है।
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ईरान से डील को लेकर अमेरिका ने तीन शर्तें रखी हैं। पहली यह कि ईरान अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम पूरी तरह बंद करे। इनर यूरेनियम के अपने स्टॉक को खत्म करें। दूसरा यह कि बैलस्टिक मिसाइल्स के स्टॉक्स को कम करे, खत्म करें। दूसरे देशों में जो उसके समर्थक गुट लड़ रहे हैं उनकी मदद करना बंद करें। ट्रंप तमाम मीडिया चैनल्स के जरिए ईरान को लगातार धमकी दे रहे हैं। उन्होंने इजरली टीवी चैनल 12 से कहा ईरान डील करे या फिर हम कोई तगड़ा एक्शन लेंगे। न्यूज़ चैनल फोक्स बिज़नेस से वो कहते हैं कि ईरान अगर डील नहीं करता तो इससे बड़ी मूर्खता तो हो ही नहीं सकती। इतना ही नहीं ट्रंप मिडिल ईस्ट में दूसरा क्राफ्ट कैरियर भेजने का भी हिंट दे चुके हैं।
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अमेरिकी न्यूज़ वेबसाइट एग्जॉस्ट के मुताबिक ट्रंप ने साफ किया है कि वह दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर भेजने की सोच रहे हैं ताकि ईरान से डील फेल होने पर सैन्य कारवाई की जा सके। अमेरिका का एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन पहले से ही मिडिल ईस्ट में तैनात है। अमेरिका के सबसे शक्तिशाली बेड़ों में से एक है यह। इस कैरियर पर 90 एयरक्राफ्ट और 3200 लोग सवार हो सकते हैं। वहीं दूसरी ओर ईरान अपनी बात पर डटा है। ईरान का कहना है कि वह सिविल पर्पस से न्यूक्लियर प्रोग्राम चला रहा है और इस पर अमेरिका से बात करने के लिए तैयार भी है।
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