मैक्रों को मिला भारत का साथ, क्या फ्रांस को रोक पाएंगे मुस्लिम देश

France Emmanuel Macron
अभिनय आकाश । Oct 30, 2020 7:41PM
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन की इस्लाम के बारे में टिप्पणियों ने इस्लामिक दुनिया के कई देशों के खिलाफ फ्रांस को खड़ा कर दिया है। इमरान खान ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पर इस्लाम पर हमला करने का आरोप लगाया है।

आप लोगों को एक कहानी सुनाने जा रहा हूँ। यह कहानी आपको कई प्रचलित लोककथाओं के संकलनों में मिल सकती है। यह कहानी सत्य का अहसास कराने के लिए, यथार्थ पर से कुहासा हटाने के लिए ताकि सच्चाई अपनी पूरी सुंदरता अथवा यथार्थ कुरूपता में दिखाई पड़ सके। 

यह कहानी एक ऐसे सम्राट के बारे में है, जो अपने लिए एक बहुत ख़ास किस्म की पोशाक तैयार कराना चाहता था- ऐसी पोशाक जो उस देश में और अगर संभव हो तो सारी दुनिया में अपने ढंग की हो। यह सोचकर उसने अनेक देशों से दर्जी बुलवाये। विदेशी दर्जियों ने सम्राट की चापलूसी करते हुए और उसके अहंकार को तुष्ट करने के ख्याल से कहा कि वे ऐसी पोशाक बनाएंगे, जिसे केवल बुद्धिमान व्यक्ति ही देख सकते हैं। काफी दिनों तक काम करने के बाद दर्जियों ने खबर दी कि अब वह पोशाक तैयार हो गयी है। सम्राट के जन्म दिवस समारोह पर इस पोशाक का उद्घाटन किया जाना था। उस दिन सम्राट ने अपने सारे कपड़े उतारे और दर्जियों ने सम्राट के शरीर पर वह पोशाक डाल दी, जिसके बारे में कहा गया था कि केवल बुद्धिमान लोग ही उसे देख सकते हैं।

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सम्राट घोड़े पर सवार हुआ और अपने स्वागत में खड़ी भीड़ के बीच से नई पोशाक पहनकर वह बड़ी शान के साथ आगे बढ़ा। सम्राट के दरबारियों ने पोशाक की प्रशंसा में जमीन-आसमान एक कर दिया और हर कोई पोशाक के बारे में नई-नई बातें बताने लगा। दरबारी कवियों ने उस पोशाक की खूबसूरती का बयान करते हुए कई गीत लिख दिए। दरबारी इतिहासकार बड़े-बड़े शोध ग्रन्थ लिखने में व्यस्त हो गए, जिनमें पोशाक के ऐतिहासिक महत्व का बखान था। दरबार के कानूनवेताओं ने सम्पति के अधिकार से सम्बंधित दस्तावेज तैयार किए, क्योंकि यह मामला सम्राट से सम्बद्ध था। लेकिन इस तमाम शोर-गुल के बीच अचानक एक बच्चे की आवाज आई,

“मम्मी, मम्मी! यह देखो, राजा एकदम नंगा है। माँ ने बच्चे को चुप कराना चाहा और चुप न होने पर उसे पीट भी दिया। लेकिन बच्चा रोते-रोते चीखता जा रहा था, “लेकिन राजा तो नंगा है, एकदम नंगा है।” ऐसा लगा कि सभी देखने वालों की आँख पर धुंध की जो पर्त चढ़ी थी, उत्तर गई और सबको वही दिखाई देने लगा जो सच था। इस कहानी का सार और इसे बताने का उद्देश्य का आखिरी में जिक्र करेंगे।

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आज तो बात सोशल मीडिया पर चल रहे सबसे चर्चित एक लाइन की करेंगे- धर्म ख़तरे में है'। हिंदुस्तान से लेकर पाकिस्तान तक. फ्रांस से लेकर स्वीडन तक। मुल्क कोई भी हो। ये बहुचर्चित वाक्य, बोतल के जिन की तरह है. इन शब्दों के इस्तेमाल से हमारे राजनेता न सिर्फ अपनी कुर्सी बचा सकते हैं बल्कि एक ठीक ठाक वक़्त के लिए पब्लिक का ध्यान मुख्य मुद्दों से भटका सकते हैं। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान फ्रांस से बहुत 'नाराज' हैं। इमरान खान ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पर इस्लाम पर हमला करने का आरोप लगाया है। फ्रांस के सफीर को मुल्कबदर करो' Kick Out the French Ambassador इन पोस्ट्रस के साथ पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में लोग सड़कों पर थे। फ्रांस मुर्दाबाद के नारे लग रहे थे। फ्रांस का झंडा जलाया जा रहा था। पाकिस्तान की संसद ने भी एक प्रस्ताव पास कर सरकार से मांग की है कि फ्रांस से पाक राजदूत को वापस बुलाया जाए। इसीतरह के प्रदर्शन बांग्लादेश, ईरान, तुर्की, फिलस्तीन, सऊदी अरब, जार्डन कुल मिलाकर कहे कि सभी मुस्लिम देशों ने फ्रांस के खिलाफ मुहिम छेड़ दी। फ्रांस ने भी तुर्की से अपना राजदूत वापस बुला लिया है। जिसके पीछे की वजह तुर्की के राष्ट्रपति आर्दोआन का वो बयान है जिसमें उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति को अपनी मानसिक हालत की जांच कराने की नसीहत दे दी। फिलिस्तीन, तुर्की, जॉर्डन, कतर, सऊदी अरब, बंग्लादेश, पाकिस्तान समेत कई मुल्कों में फ्रांस की मज़म्मत की जा रही है। यहां तक कि प्रॉडक्ट्स का बॉयकॉट किया जा रहा है।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन की इस्लाम के बारे में टिप्पणियों ने इस्लामिक दुनिया के कई देशों के खिलाफ फ्रांस को खड़ा कर दिया है। 

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कार्टून दिखाने के बाद हुई थी शिक्षक की हत्या

फ्रांस में एक 47 वर्षीय शिक्षक सैमुअल पैटी ने अपनी कक्षा में छात्रों को पैगंबर मोहम्मद के कार्टून दिखाए थे। ये कार्टून व्यंग्यात्मक साप्ताहिक पत्रिका शार्ली हेब्दो में छपे कार्टून की कॉपी थे। इसके कुछ दिन बाद ही 16 अक्टूबर को 18 वर्षीय चेचन शरणार्थी ने पैटी की गला काटकर हत्या कर दी थी। मैक्रों ने इसे 'इस्लामिक आतंकवादी' हमला कहा और उनकी सरकार ने 'इस्लामिक आतंकवाद' के खिलाफ लड़ाई छेड़ दी। उन्होंने कहा कि फ्रांस "कार्टून, चित्र नहीं छोड़ेंगे, भले ही अन्य लोग पीछे हट जाएं"। 

पश्चिम यूरोप की सर्वाधिक मुस्लिम आबादी फ्रांस में

फ्रांस में पश्चिमी यूरोप की सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी रहती है जो देश की कुल आबादी का 9-10 प्रतिशत है। ये लोग ट्यूनीशिया, अल्जीरिया, मोरक्को और माली से आकर फ्रांस में बसे हैं।

मुस्लिम दुनिया के कई देश फ्रांस से नाराज क्यों हैं?

फ्रांस का इस्लाम और उसके 5 मिलियन मुस्लिम नागरिकों (उसकी आबादी के सिर्फ 9 प्रतिशत से कम) के साथ एक लंबा और जटिल संबंध है। पैटी की हत्या के कुछ दिन पहले, मैक्रों ने एक विवादास्पद भाषण दिया था। उन्होंने घोषणा की कि "इस्लाम एक ऐसा धर्म है जो आज पूरे विश्व में संकट में है। इसके अलावा मैक्रों एक कानून सख्त करने की भी बात कह रहे हैं, जो राज्य को चर्च से अलग यानी धर्म को सरकार से अलग करने के लिए लाया गया था। उनका कहना है कि 'इस्लामी अलगाववाद' और 'धर्मनिरपेक्ष मूल्यों' के बचाव के लिए यह जरूरी है।

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कानून पारित होने के बाद क्या बदलाव आएगा?

बीते 2 अक्टूबर को अपने भाषण में मैक्रों ने 1905 में लाए गए इस कानून को मजबूत करने की बात कही। अगर यह कानून पारित हो जाता है तो फ्रांस में छोटे बच्चों को घरों में इस्लामी शिक्षा नहीं दी जा सकेगी और विदेशी के इमाम देश की मस्जिदों में इमामत नहीं कर पाएंगे।

मैक्रों दिमागी इलाज करवाएं

तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन ने बयान जारी किया कि मैक्रों का मुस्लिमों और इस्लाम को लेकर रवैया बताता है कि उन्हें दिमागी इलाज की ज़रूरत है. 'जिस देश में लाखों मुस्लिम रह रहे हैं, उसके प्रमुख को जब आस्था की स्वतंत्रता को लेकर ही समझ नहीं है तो और क्या कहा जाए?'

'अभिव्यक्ति के नाम पर ईशनिंदा?'

कुवैत के विदेश मंत्री ने फ्रेंच टीचर की हत्या की निंदा की लेकिन यह भी कहा कि इस पर राजनीति करते हुए नफरत और नस्लवाद फैलाना ठीक नहीं है. उधर, सऊदी अरब स्थित 57 देशों के इस्लामिक संगठन ने पैगंबर मोहम्मद के कार्टूनों की प्रैक्टिस की निंदा करते हुए कहा था कि अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर आप किसी धर्म की या ईशनिंदा नहीं कर सकते.

ध्रुवीकरण की राजनीति न करें

पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने भी इस बहस में कूदते हुए ट्वीट किया और कहा कि ऐसे समय में मैक्रों को हमदर्दी से काम लेना था, न कि ध्रुवीकरण की राजनीति करते हुए कट्टरता को बढ़ावा देना था। 'यह नाज़ीवादी अप्रोच है, जो इस्लामोफोबिया फैलाने में यकीन रखती है.' वहीं मोरक्को और जॉर्डन ने भी मोहम्मद के कार्टूनों के प्रकाशन पर ऐतराज़ जताया।

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फ्रांस का रवैया समझना ज़रूरी

हत्या की एक घटना या कार्टूनों के प्रकाशनों को मैक्रों की हिमायत मिलने के कारण बात इतनी नहीं बढ़ी कि पूरा मुस्लिम वर्ल्ड फ्रांस के खिलाफ हो जाए और वो भी इतने पुरज़ोर तरीके से। रिपोर्ट्स के मुताबिक 60 लाख मुस्लिमों की आबादी वाले फ्रांस के बॉयकॉट के पीछे और भी कारण हैं।

1905 से सेक्युलर विचार अपनाने वाले फ्रांस ने पिछले कुछ समय से इस्लाम के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया। फ्रांस के मुस्लिमों को 'काउंटर सोसायटी' कहा जाता है और यह भी तथ्य है कि यूरोप में फ्रांस वह देश था, जिसने 2004 में हिजाब पर प्रतिबंध लगाया।

मैक्रों 'इस्लाम में सुधार' संबंधी बयान दे चुके हैं, जिन पर काफी तीखी प्रतिक्रिया हो चुकी है। यह फैक्ट भी कुछ कहता है कि 2012 से फ्रांस में मुस्लिम अल्पसंख्यकों ने करीब 36 हमले किए हैं।

इस्लाम के खिलाफ लामबंदी को 2022 चुनाव के मद्देनज़र मैक्रों की राजनीति भी माना जा रहा है। मैक्रों एक ऐसा कानून लाने की तैयारी में हैं, जिसके तहत विदेशी फंड से ट्रेंड इमाम फ्रांस में नहीं आ सकेंगे। यह भी प्रस्ताव है कि मस्जिदों को स्टेट फंडिंग मिले और टैक्स ब्रेक्स भी।

मैक्रों खुद 'इस्लाम के संकट' में होने संबंधी बयान देते रहे हैं, तो उनके मंत्री भी 'इस्लामी अलगाववाद' और इस्लाम को केंद्र में रखकर फ्रांस के सामने 'सिविल वॉर' के खतरे होने जैसे बयान देते रहे हैं।

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अब वापस से लौटते हैं उसी राजा की कहानी पर और उसके वर्तमान के संदर्भ पर। जहां उसी तरह इस्लामी आतंक और उन्माद से होने वाले हर कृत्य के बाद भी किसी चालाक व्यक्ति ने दिव्य कपड़े पहनाने की योजना बनाई, और कहा कि सच्चा इस्लाम तो उसी को दिखेगा जो सेक्युलर है। अब, आज के दौर में कौन सेक्युलर कहलाना नहीं चाहेगा। सबको सेक्युलर बनना है, सबके देश में इस्लामी आतंक ने अपनी छाप छोड़ी है। लेकिन तथ्य और अकाट्य सत्य यह है कि राजा तो नंगा है, और उसे नंगा कहने की क्षमता उसी में है जो इन सामाजिक, राजनैतिक जुमलेबाजी और पॉलिटिकली करेक्ट होने के भार से अनभिज्ञ हो। 

पेरिस के उत्तर पूर्वी इलाके की पेंटिन में स्थित मस्जिद को देखने पर कुछ अलग होने के संकेत साफ दिखाई प्रतीत होते हैं। पूर्वी तरह खाली दिख रही ये बिल्डिंग किसी एयर क्राफ्ट इस खाली बल्डिग के बाहर एक सरकारी नोटिस चस्पा है जिस पर लिखा है कि इस्लामी मूवमेंट में शामिल होने और टीचर को निशाना बनाकर सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करने की वजह से सरकार को इस बिल्डिंग को जबरन बंद करना पड़ा है। 

फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रो का अहम बयान- ‘अब डर पाला बदलेगा’

समय आ गया है कि दुनिया भर के लोग इस्लामिक कट्टरवाद की जमीनी हकीकत को समझें। फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रो का अहम बयान है कि ‘अब डर पाला बदलेगा।’ क्या दुनिया के दूसरे देश उनकी इस नीति से सहमत हैं? यदि सहमत नहीं हैं तो उनके पास दूसरा क्या रास्ता है, क्योंकि चुप बैठना कोई विकल्प नहीं है और डर को पाला बदलने के लिए जरूरी है कि न केवल कट्टरपंथियों से सख्ती से निपटा जाए, बल्कि उनके समर्थन को सीमित किया जाए। इससे पहले कि गैर मुस्लिम बिरादरी इन कट्टरपंथियों का विरोध करते-करते पूरे समुदाय के ही खिलाफ हो जाए, मुस्लिम समुदाय इन तत्वों के खिलाफ खड़ा हो। दुनिया में शांति और भाईचारे के लिए यही एक रास्ता है।

भारत ने जताया अपना रुख

भारत के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी करके कहा- राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों के ऊपर अस्वीकार्य भाषा में किए गए निजी हमलों की हम भर्त्सना करते हैं। ये भाषा अंतरराष्ट्रीय डिस्कोर्स के सबसे मूलभूत स्तरों का उल्लंघन करती है। हम उस हमले की भी कड़ी निंदा करते हैं, जिसने एक फ्रेंच टीचर की जान ले ली, और पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया। हम उनके परिवार और फ़्रांस के लोगों को सांत्वना देते हैं।

विदेश मंत्रालय के बयान के बाद भारत में फ्रांस के राजदूत एमैनुएल लेनों ने ट्वीट करके लिखा-

शुक्रिया मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स, इंडिया। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में फ्रांस और भारत हमेशा एक-दूसरे पर भरोसा कर सकते हैं।- अभिनय आकाश

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