तो इसलिए बैन हुआ टेलीग्राम! रिलायंस का नाम अचानक कैसे सामने आया?

Telegram
AI Image
अभिनय आकाश । Jun 17 2026 2:10PM

सरकार ने 30 जून तक टेलीग्राम से ये एडिट वाला फीचर बंद करने को कहा है। तो सवाल ये है कि टेलीग्राम में ऐसा क्या है जो बार-बार सरकार और लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों का ध्यान खींच लेता है। क्या समस्या टेलीग्राम है या फिर इंटरनेट एक बड़ा चैलेंज है?

टेलीग्राम कुछ लोगों के लिए सिर्फ एक सिंपल मैसेजिंग एप है। कुछ लोग इससे न्यूज अपडेट लेते हैं। कुछ लोग स्टड ग्रप्स को ज्वाइन कर लेते हैं और कुछ लोगों के लिए टेलीग्राम इंटरनेट का सबसे पावरफुल ब्राडकास्टिंग प्लेटफॉर्म है। लेकिन जून 2026 में टेलीग्राम फिर से हेडलाइंस में आ गया है। री-नीट का पर्चा भी लीक न हो जाए इसलिए सरकार ने हफ्ते भर पहले टेलीग्राम बैन कर दिया है। 21 जून को परीक्षा है और 22 जून तक टेलीग्राम बैन रहेगा। फैसला एनटीए की रिक्वेस्ट पर लिया गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने ये बैन आईटी एक्ट 2000 का धारा 69ए के तहत लगाया है। लेकिन टेलीग्राम बैन करने की वजह क्या है? रूस में बने इस एप के कारण भारत में ऐसा क्या हो रहा है जिससे परीक्षाएं प्रभावित हो रही हैं। पेपर लीक के कई मामलों में ये देखा गया है कि सर्कुलेशन का माध्यम टेलीग्राम बनता है। 2024 का नीट हो या 2026 का दोनों एग्जाम में पेपर लीक के तार टेलीग्राम से जुड़े थे। टेलीग्राम ग्रुप से पेपर के स्क्रीनशॉट्स सर्कुलेट होने की बात सामने आई थी। जिसके बाद कई टेलीग्राम ग्रुप्स को बंद कर दिया गया था। लीक करने वाले टेलीग्राम पर पेपर और पैसे का लेन देन करते हैं। टेलीग्राम पर ये करना उनके लिया थोड़ा मुफीद भी होता है। वजह है इस एप के कई फीचर्स और जो लोग इस एप का इस्तेमाल करते हैं। उन्हें पता होगा कि एप में 2 लाख लोगों तक को जोड़ा जा सकता है। यानी एक सेकेंड में लाखों लाख लोगों तक पहुंचाया जा सकता है। टेलीग्राम में सीक्रेट चैट्स की भी सुविधा है। मैसेज सिर्फ सेंडर और रिसीवर ही पढ़ सकते हैं बीच में उसे हैक करके कोई डिकोड नहीं पढ़ सकता है। टेलीग्राम में मिनटों में बॉट अकाउंट भी तैयार हो जाता है। दिखने में अकाउंट एकदम मशीनी लगेगा, लेकिन उसे चला कोई इंसान रहा होगा। उसका नाम और नंबर पता लगाना आम लोगों के लिए मुश्किल होता है। ज्यादातर मैसेजिंग एप में आप एक दो दिन पहले का मैसेज एडिट नहीं कर सकते। लेकिन टेलीग्राम में ये भी संभव है। सरकार ने 30 जून तक टेलीग्राम से ये एडिट वाला फीचर बंद करने को कहा है। तो सवाल ये है कि टेलीग्राम में ऐसा क्या है जो बार-बार सरकार और लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों का ध्यान खींच लेता है। क्या समस्या टेलीग्राम है या फिर इंटरनेट एक बड़ा चैलेंज है? 

इसे भी पढ़ें: सरकारी आदेश पर Google का एक्शन, Play Store से Telegram ऐप गायब, Apple भी जल्द हटाएगा

सरकार ने टेलीग्राम क्यों बैन कर दिया?

टेलीग्राम पर कोई व्यक्ति अपनी पहचान छिपाकर ऐसा चैनल बना सकता है, जिसमें असीमित लोग जुड़ सकते हैं। 'पेपर लीक्ड नीट' जैसे चैनलों पर लाखों लोग थे, जिनकी ट्रैकिंग कठिन थी। टेलीग्राम पर पुराने मैसेज एडिट करने पर भी उसका असली समय नहीं बदलता। परीक्षा खत्म होने के बाद एडमिन अपने पुराने और सामान्य मैसेज को एडिट करके वहां असली प्रश्न पत्र की पीडीएफ डाल देते थे। फिर इसका स्क्रीनशॉट दिखाकर झूठा दावा करते थे कि परीक्षा से पहले लीक हो गया था।

टेलीग्राम पर बड़ी फाइलें शेयर करने का क्या नियम है, जो दुरुपयोग की वजह बना? 

टेलीग्राम पर बिना साइज कम किए 2GB तक की बड़ी फाइलें आसानी से शेयर की जा सकती हैं। इसी वजह से इस पर परीक्षा के पेपर और फिल्में आसानी से लीक की जाती हैं। 

क्या टेलीग्राम कार्रवाई नहीं करता है?

कार्रवाई करता है। टेलीग्राम ने 2025 में 4.35 करोड़ से ज्यादा चैनल ब्लॉक किए थे और 2026 में रोजाना हटाए जाने वाले चैनलों की संख्या बढ़ाकर 80,000 से 1,40,000 तक कर दी है, लेकिन यह नाकाफी साबित हुई। टेलीग्राम पर अपराधियों को पहचान छिपाने और लाखों का ग्रुप बनाने की आजादी मिलने से इस पर अस्थायी प्रतिबंध लगाना पड़ा। वहीं, वॉट्सएप भारतीय नियमों को मानता है। यहां यूजर को ट्रैक करना आसान है... वॉट्सएप पर मोबाइल नंबर जरूरी, टेलीग्राम पर 'यूजरनेम' से पहचान छिपती है, वॉट्सएप पर चैट डिफॉल्ट एन्क्रिप्टेड और ग्रुप मेंबर्स सीमित (1,024) हैं। टेलीग्राम में असीमित लोग जुड़ सकते हैं, जिससे पेपर जल्दी वायरल होते हैं। वॉट्सएपः भारत में ऑफिस। एआई से निगरानी। टेलीग्राम में इसकी कमी है। 

टेलीग्राम सीईओ ने क्यों बताया रिलायंस की साजिश

भारत सरकार के इस फैसले पर टेलीग्राम के फाउंडर और सीईओ पावेल डुरोफ का बयान आया और उन्होंने कहा कि इस एक्शन से करोड़ों भारतीयों का नुकसान होने वाला है। पेपर लीक करने वाले किसी दूसरे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर लेंगे। टेलीग्राम बैन से कुछ नहीं होगा। 16 जून को पावेल डुरोफ ने सोशल पोस्ट में लिखा कि कुछ लोगों ने एग्ज़ाम का लीक पेपर टेलीग्राम पर शेयर कर दिया था। इसलिए भारत सरकार के आईटी मंत्रालय ने इसे एक हफ्ते के लिए बैन कर दिया है। लेकिन इस फैसले का असर 15 करोड़ से ज़्यादा आम टेलीग्राम यूज़र्स पर पड़ा। पेपर लीक करने वाले असली लोगों पर नहीं। और, इस बैन से पेपर लीक भी नहीं रुका। लीक किए गए पेपर बस दूसरे ऐप्स पर शेयर किए जाने लगे। डुरोव ने लिखा कि अगर आप टेलीग्राम को कुछ दिनों के लिए भी बैन कर रहे हैं। तब भी ये आपकी बहुत बड़ी गलती है। एक और एक्स पोस्ट में उन्होंने लिखा कि  भारतीय टेलीकॉम कंपनी रिलायंस भारत के बाहर (यूएई जैसे कई देशों में) लाखों लोगों के लिए टेलीग्राम के इस्तेमाल को रोकने की कोशिश कर रही है। इसके लिए BGP हाईजैकिंग नाम की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हो रहा है। ये काम जानबूझकर किया जा रहा है। क्योंकि कई शिकायतें मिलने के बाद भी रिलायंस ने कोई एक्शन नहीं लिया। ये टेलीग्राम और व्हाट्‌सऐप के बीच कॉम्पिटिशन का हिस्सा हो सकता है। रिलायंस में मेटा की हिस्सेदारी है। इंटरनेशनल इंटरनेट रुटिंग सिस्टम का इस तरह से शोषण करना चिंताजनक है। भारत में टेलीग्राम बैन के पीछे रिलायंस या व्हाट्सऐप की भूमिका भी हो सकती है।

 टेलीग्राम ने किया कोर्ट का रुख

केंद्र सरकार के फ़ैसले के ख़िलाफ़ टेलीग्राम ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख़ किया है। यह मामला जस्टिस तेजस करिया की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने रखा गया, जिन्होंने आज बाद में इस मामले की सुनवाई करने पर सहमति जताई। सरकार का यह कदम NEET UG पेपर लीक विवाद के बाद उठाया गया है, जिसके कारण प्रभावित उम्मीदवारों के लिए दोबारा परीक्षा कराने का फ़ैसला किया गया था। अधिकारी परीक्षा से पहले सुरक्षा में किसी भी तरह की चूक को रोकने के लिए कदम उठा रहे हैं। यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ के समक्ष उल्लेखित किया गया। कंपनी का कहना है कि उस पर लगाया गया प्रतिबंध उचित नहीं है और इससे लाखों वैध उपयोगकर्ताओं पर असर पड़ रहा है। इसलिए इस निर्णय की न्यायिक समीक्षा की जानी चाहिए।

All the updates here:

अन्य न्यूज़