Balaghat में बीमार बच्चों के परिवारों से मिलने पहुंचे Abhijeet Deepke, सोशल मीडिया क्रिएटर्स ने रोका

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मध्य प्रदेश के बालाघाट में संक्रामक बीमारियों से पीड़ित बच्चों के परिजनों का हाल जानने पहुंचे सीजेपी नेता अभिजीत दीपके का सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स से सामना हो गया। आदोरी, कोरका और बोंदारी गांवों के इस दौरे में बहस के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने उन्हें दूसरी गाड़ी से सुरक्षित निकाला। उच्च न्यायालय ने भी इलाके में 30 से अधिक बच्चों की मौत पर सरकार को नोटिस जारी किया है।

मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में शनिवार को आदिवासी परिवारों से मिलने पहुंचे कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके को सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स या कंटेंट क्रिएटर्स के एक समूह ने कथित तौर पर घेर लिया और उनसे बहस की। दीपके आदोरी, कोरका और बोंदारी गांवों में उन आदिवासी परिवारों से मिलने पहुंचे थे, जिनके बच्चों की कथित तौर पर संक्रामक बीमारियों के कारण मौत हुई है। उनका मकसद क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति की भी जानकारी जुटानी थी।

सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में एक महिला खुद को इन्फ्लुएंसर बताते हुए कार में सवार दीपके के सामने माइक लेकर उनसे पूछती सुनाई दे रही है कि क्या वह लाशों पर राजनीति करने आए हैं और इतनी देर से क्षेत्र का दौरा क्यों कर रहे हैं। वीडियो में दीपके यह कहते सुनाई दे रहे हैं कि क्षेत्र का दौरा करने में हुई देरी के लिए वह माफी मांगते हैं। महिला को यह कहते भी सुना गया, यहां अच्छी सड़क बनी है, दिखाई नहीं दे रही क्या?

बहस बढ़ने पर दीपके के साथ आए सीजेपी कार्यकर्ताओं ने उन्हें दूसरी कार में बैठाया और वहां से रवाना कर दिया। उनके जाने के दौरान महिला को यह कहते सुना गया, भाग गया, भाग गया। स्थानीय पत्रकारों ने दावा किया कि दूरदराज के गांव में बाहर से आए सोशल मीडिया ‘इन्फ्लुएंसर्स’ के इस समूह को देखकर वे हैरान थे।

उन्होंने आशंका जताई कि दीपके के दौरे में बाधा डालने के लिए इन लोगों को किसी के कहने पर वहां भेजा गया था। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इस बीच, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की जबलपुर पीठ ने इस सप्ताह क्षेत्र में 30 से अधिक बच्चों की मौत के मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा था।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य के स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, बालाघाट जिलाधिकारी और अन्य को नोटिस जारी किए थे। याचिका में आरोप लगाया गया है कि बच्चों को पर्याप्त उपचार नहीं मिल रहा है और करीब 400 बच्चों का इलाज महज 50 बिस्तरों की क्षमता वाले अस्पताल में किया जा रहा है।

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