सत्ता लोलुपता के दौर में जेटली का यह कदम बनेगा औरों के लिए नजीर

By अभिनय आकाश | Publish Date: Jun 10 2019 6:02PM
सत्ता लोलुपता के दौर में जेटली का यह कदम बनेगा औरों के लिए नजीर
Image Source: Google

अंग्रेजी की एक न्यूज वेबसाइट के अनुसार जेटली ने अपने कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों की संख्या में कमी कर दी है और अब वो अपने निजी बंगले में शिफ्ट होने जा रहे हैं। इसके अलावा पूर्व वित्त मंत्री ने सरकारी गाड़ी को भी वापस कर दिया है।

एक नाम एक किरदार में तब्दील होता है और फिर कहानी बन जाती है। कुछ कहानी कुछ सेकेंड जीवित रहती है तो कुछ मिनट तो कुछ घंटों और कुछ कहानी मिसाल बनकर लोगों के जेहन में उतर जाती हैं बरसों। शपथ ग्रहण से एक दिन पहले अरुण जेटली ने अटकलों पर रोक लगाते हुए एक चिट्ठी लिखी थी। जेटली ने साफ कर दिया था कि उनकी तबीयत खराब है वो मोदी सरकार पार्ट 2 के मंत्रीमंडल में जगह नहीं चाहते हैं। 

इसे भी पढ़ें: अरुण जेटली से मिले नरेंद्र मोदी, सरकार गठन पर हुई चर्चा

ये तो कहानी का पहला भाग था लेकिन उसके बाद साफगोई से पिछली सरकार में मिली सुख-सुविधाओं का परित्याग करते हुए जेटली ने राजनीति के निरंतर गिरते स्तर में खुद को मूर्धन्य की तरह शीर्ष पर स्थापित करने का काम किया है। कभी विवादों में पड़ते नहीं, किसी से लड़ते नहीं लेकिन अपनी बात कहने से पीछे हटते नहीं। विवादों से दूर रहने वाले अरुण जेटली, क्लीन इमेज वाले अरूण जेटली, सॉफ्ट स्पोकन अरुण जेटली और मिलनसार होने के साथ-साथ कड़े औऱ बड़े फैसले लेने वाले अरुण जेटली। 

इसे भी पढ़ें: सरकार-2 की शपथ से पहले ही सक्रिय राजनीति से रिटायर हुए जेटली



कभी भाजपा के दफ्तर में दो कोट टांग कर जाने वाले अरूण जेटली वकालत का कोट उतारकर प्रवक्ता के रोल में आ जाते थे। जिसकी लोधी गार्डन की चहलकदमी हो या पश्मिना शॉल दोनों के किस्से मशहूर हैं और मशहूर हैं जिनके कानूनी दांव-पेंच जिसके जरिए संसद की कई सीढ़ियों को तेजी से उन्होंने नाप दिया। लेकिन वर्तमान में अरुण जेटली बीमार हैं इसी वजह से उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ने से दूरी बनाई और नई सरकार में कोई जिम्मेदारी नहीं उठाई। 

इसे भी पढ़ें: चुनाव आयोग पर विपक्ष का प्रहार, हार का बहाना: अरुण जेटली

अंग्रेजी की एक न्यूज वेबसाइट के अनुसार जेटली ने अपने कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों की संख्या में कमी कर दी है और अब वो अपने निजी बंगले में शिफ्ट होने जा रहे हैं। इसके अलावा पूर्व वित्त मंत्री ने सरकारी गाड़ी को भी वापस कर दिया है। जिसके बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि अरुण जेटली अब दक्षिणी दिल्ली स्थित अपने निजी आवास पर अपने परिवार के साथ रहेंगे। वेबसाइट के अनुसार स्वस्थ्य होने पर अरुण जेटली राज्यसभा सांसद होने के नाते दोबारा किसी छोटे सरकारी बंगले के लिए सरकार से निवेदन कर सकते हैं। 

इसे भी पढ़ें: चुनाव आयोग पर विपक्ष का प्रहार, हार का बहाना: अरुण जेटली

लेकिन जिस दौर में नेताओं के बंगले को लेकर कई किस्से मशहूर हैं और सरकारी आवास को खाली कराने के लिए कभी पुलिस बल तो कभी अदालत का सहारा लेने जैसे कई उदाहरण इतिहास में मौजूं हैं। बिहार का बंगला विवाद जब लालू के छोटे लाल तेजस्वी यादव को सुप्रीम कोर्ट ने न सिर्फ बंगला खाली करने का आदेश सुनाया था, बल्कि पचास हजार रुपए का आर्थिक दंड भी लगाया था। मुलायम सिंह यादव के सुपुत्र अखिलेश यादव ने तो बंगला खाली करने के क्रम में न ही सिर्फ कई जगहों को क्षतिग्रस्त कर दिया था बल्कि उन पर टोटी खोलकर ले जाने के इल्जाम भी लगे थे। 



इसे भी पढ़ें: अरुण जेटली बोले, प्रधानमंत्री पद के लिए मुकाबला अब ‘एकतरफा’

पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के पुत्र अजीत सिंह ने सरकार के आदेश के बाद भी सरकारी बंगला खाली नहीं किया था। जिसके बाद बंगले का बिजली-पानी का कनेक्शन काट दिया गया था। जिस पर अजीत सिंह की अपील पर उनके समर्थक हरियाणा से दिल्ली को पानी की आपूर्ति रोकने पर आमादा हो गए थे। पूर्व केंद्रीय मंत्री के समर्थकों को रोकने के लिए पुलिस को भारी मशक्कत करनी पड़ी थी। 

इसे भी पढ़ें: राजीव गांधी सरकार की ईमानदारी पर सवाल उठाने से राहुल क्यों इतने परेशान हैं: जेटली

बहरहाल, इतिहास को छोड़ वर्तमान की उंगली थाम अरुण जेटली के इस कदम को देखें तो उन्होंने राजनीति में एक नई पहल की है जो आगे चलकर सुख-सुविधाओं के लोभ में राजनीति की ओर रुख करने वालों के लिए नजीर बनेगी। अरुण जेटली जल्द ही स्वस्थ्य हों ऐसी कामना और प्रार्थना सभी को करनी चाहिए क्योंकि जल्द ही स्वस्थ्य होकर इस तरह के असाधारण उदाहरण राजनीति में आगे भी पेश करते रहें।



रहना है हर खबर से अपडेट तो तुरंत डाउनलोड करें प्रभासाक्षी एंड्रॉयड ऐप   


Related Story

Related Video