CEC नियुक्ति में PM, LoP के साथ CJI भी हों शामिल, Owaisi ने मौजूदा चयन प्रक्रिया पर उठाए सवाल

Owaisi
ANI
अंकित सिंह । Oct 6 2026 6:22PM

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पैनल में CJI को शामिल करने की मांग दोहराई और मौजूदा चयन प्रक्रिया को एग्जीक्यूटिव के पक्ष में बताया। उन्होंने दिल्ली में INDIA ब्लॉक के विरोध प्रदर्शन से खुद को अलग रखा और वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन को पिछले दरवाजे से NRC करार दिया।

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की नियुक्ति करने वाले पैनल में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को शामिल करने की अपनी मांग दोहराई और मौजूदा चयन प्रक्रिया को सबसे बड़ी समस्या बताया। मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 के तहत, चयन समिति में प्रधानमंत्री अध्यक्ष के तौर पर, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं।

इसे भी पढ़ें: CEC विरोध पर CM Devendra Fadnavis बोले, संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की है साजिश

6 अक्टूबर को हैदराबाद में पत्रकारों से बात करते हुए ओवैसी ने कहा कि उन्होंने दिल्ली में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA ब्लॉक के विरोध प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लिया क्योंकि AIMIM इस गठबंधन का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि मैं वहां नहीं गया क्योंकि मैं उस (गठबंधन) का हिस्सा नहीं हूं। बेगानी शादी में मेरा क्या काम? मुख्य चुनाव आयुक्त को चुनने की प्रक्रिया गलत है। यह पूरी तरह से एग्जीक्यूटिव के पक्ष में है। इस प्रक्रिया को बदलने की जरूरत है। मुख्य चुनाव आयुक्त का चयन सबसे बड़ी समस्या है। यह गलत है; इसे ठीक किया जाना चाहिए।

ओवैसी ने वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) की भी आलोचना की और इसे "पिछले दरवाजे से NRC" करार दिया। उन्होंने आगे कहा कि बिहार में SIR प्रक्रिया के दौरान भी मैंने आवाज उठाई थी। मेरी मांग है कि CEC के चयन के कानून को बदला जाए। CJI, PM और LoP से चयन करवाया जाए। यह SIR गलत है। मेरा मानना ​​है कि SIR पिछले दरवाजे से NRC है। पिछले महीने, सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं—खासकर चयन पैनल से CJI को हटाने के मामले—को पांच जजों की बड़ी बेंच के पास भेजने या न भेजने पर बंटा हुआ फैसला सुनाया।

इसे भी पढ़ें: EC मार्च पर Kiren Rijiju का Rahul Gandhi पर हमला, कहा- यह ड्रामा कब तक चलेगा?

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच की इस मुद्दे पर अलग-अलग राय थी। जस्टिस दत्ता ने मामले को बड़ी बेंच के पास भेजने की मांग को खारिज कर दिया, जबकि जस्टिस शर्मा का मानना ​​था कि इस मुद्दे पर संविधान बेंच को विचार करना चाहिए। बेंच ने सर्वसम्मति से निर्देश दिया कि मामले को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के सामने रखा जाए ताकि वे उचित संख्या वाली संविधान बेंच के गठन पर विचार कर सकें। बेंच ने कहा कि इस सवाल को पहले तीन जजों की बेंच के पास भेजने से कार्यवाही में बेवजह देरी होगी।
 

All the updates here:

अन्य न्यूज़