बिहार में बाढ़ पीड़ितों को DBT से मिले 112.14 करोड़ रुपये, Samrat Choudhary ने जारी की राहत

Samrat Choudhary
ANI
अंकित सिंह । Oct 12 2026 6:14PM

बिहार में बाढ़ प्रभावित 1,60,201 परिवारों के बैंक खातों में डीबीटी के जरिए 112.14 करोड़ रुपये की राहत राशि ट्रांसफर की गई, जिससे प्रत्येक परिवार को 7,000 रुपये मिले। अब तक कुल 10,37,391 परिवारों को 726.17 करोड़ रुपये की सहायता दी जा चुकी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को नुकसान की लगातार निगरानी करने और विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 12 अक्टूबर को बाढ़ से प्रभावित 1,60,201 परिवारों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के ज़रिए 112.14 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। हर परिवार को 7,000 रुपये की आर्थिक सहायता मिली। अब तक, बाढ़ से प्रभावित कुल 10,37,391 परिवारों को राहत दी जा चुकी है, जिसके तहत कुल 726.17 करोड़ रुपये की राशि दी गई है। 6 अक्टूबर को मुख्यमंत्री चौधरी ने राज्य में बाढ़ की स्थिति और उससे हुए नुकसान का जायजा लिया और अधिकारियों को जल्द से जल्द विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।

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यह समीक्षा बैठक लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प’ सभागार में हुई, जिसमें बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद नितिन नवीन भी शामिल हुए। जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने मुख्यमंत्री को बाढ़ के कारणों और स्थिति के क्रमिक विकास के बारे में जानकारी दी। पहले चरण में, गंगा, सोन, घाघरा, कोसी और पुनपुन नदियों में जलस्तर ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए नया उच्चतम स्तर दर्ज किया। दूसरे चरण में, भारी बारिश के कारण गंडक नदी का जलस्तर चार स्थानों पर अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। इसके अलावा, पश्चिम चंपारण, गोपालगंज और सारण जिलों में छह स्थानों पर तटबंध क्षतिग्रस्त हो गए।

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आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल ने बाढ़ के बीच चलाए जा रहे राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री चौधरी ने कहा कि इस वर्ष गंभीर बाढ़ की स्थिति गंगा, गंडक और सोन नदियों में पिछले वर्षों की तुलना में असाधारण रूप से अधिक जल स्तर के कारण उत्पन्न हुई है। उन्होंने नदी तल में गाद के जमाव को भी एक प्रमुख कारण बताया और इस बात पर प्रकाश डाला कि बिहार भारत का पहला राज्य है जिसने गाद नीति बनाई है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे नदियों की वर्तमान स्थिति और बाढ़ से हुए नुकसान की लगातार निगरानी करें और प्रभावित क्षेत्रों में राहत, पुनर्वास और आवश्यक विकास कार्यों को सुगम बनाने के लिए शीघ्र ही एक प्रारंभिक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

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