मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल सेवा योजना आरंभ, मुख्यमंत्री बोले अनाथ हुए बच्चे यह न समझें कि उनके माँ-बाप नहीं हैं

मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल सेवा योजना आरंभ, मुख्यमंत्री बोले अनाथ हुए बच्चे यह न समझें कि उनके माँ-बाप नहीं हैं
प्रतिरूप फोटो

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि बेटियों की शादी के समय सहायता के संबंध में भी राज्य सरकार विचार करेगी। इसके साथ ही प्रभावित बच्चों को राज्य सरकार की अन्य योजनाओं का लाभ भी दिया जायेगा।

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह  चौहान ने रविवार को मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल सेवा योजना के पात्र हितग्राही बच्चों को निवास से वर्चुअली पेंशन राशि का वितरण किया। योजना के शुभारंभ अवसर पर 130 परिवारों के 173 बच्चों के खातों में प्रति बच्चा प्रतिमाह 5 हजार रूपये के मान से सिंगल क्लिक से राशि अंतरित की गई।  इस दौरान प्रमुख सचिव महिला एवं बाल विकास अशोक शाह ने योजना की जानकारी दी। मुख्यमंत्री चौहान ने योजना के हितग्राही बच्चों और बच्चों के संरक्षकों से वर्चुअली संवाद किया। मुख्यमंत्री ने अभिभावकों और बच्चों को संबोधित भी किया। प्रदेश की सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कार्यक्रम से जुड़ी थीं।

 

इसे भी पढ़ें: मध्य प्रदेश में 1 जून से सरकारी कार्यालय आयेंगे 100 प्रतिशत अधिकारी और 50 फीसदी कर्मचारी

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा है कि हम कोविड के महासंकट में अनाथ हुए बच्चों को यह अहसास नहीं होनें देगें कि उनके माँ-बाप नहीं हैं। हम हर बच्चे की उंगली थामेंगे। कोरोना की विपदा के कारण अनाथ हुए सभी बच्चों की पढ़ाई लिखाई, भोजन और आर्थिक सुरक्षा का ध्यान रखा जाएगा। बच्चे मेहनत करें, अपने माता-पिता के सपनों को साकार करें। मैं आपका मामा और कल्याणकारी राज्य सरकार हर कदम पर आपके साथ है। उल्लेखनीय है कि कोरोना के कारण जिन बच्चों के सिर से माता-पिता का साया उठ गया है उन्हें तत्काल सहायता उपलब्ध कराने और उनके गरिमापूर्ण जीवन निर्वाह के लिए मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल सेवा योजना आरंभ की गई है। 21 मई 2021 से  आरंभ  इस योजना में बच्चों को 5 हजार रूपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता, नि:शुल्क राशन और बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था की जाएगी।

 

इसे भी पढ़ें: हनीट्रैप पेनड्राइव पर कमलनाथ का बड़ा बयान, कांग्रेस ने शिवराज सरकार पर लगाया आरोप

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रदेश एक भयानक त्रासदी से गुजरा है। ऐसी महामारी सैकड़ों सालों में एक बार आती है। कोरोना की पहली लहर का प्रकोप कम था परंतु दूसरी लहर में संक्रमितों की संख्या अप्रत्याशित रूप से तेजी से बढ़ी और वायरस की अधिक घातकता के कारण कई लोग हमारा साथ छोड़ गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मेरी जिंदगी का सब से भयानक दौर था। संभालने के कई प्रयासों के बाद भी हम कई भाई-बहनों को बचा नहीं पाये।  मासूम बच्चों के सिर से माता-पिता का साया उठने से स्थिति अधिक पीड़ादायक बनी। जिन घरों में अब माता-पिता दोनों नहीं हैं वहां वेदना बहुत अधिक है।

 

इसे भी पढ़ें: मध्य प्रदेश में रविवार को कोरोना संक्रमण के 1476 नये मामले, 60 लोगों की मौत

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि ऐसे बच्चों को दर-दर की ठोकरें खाने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता। सरकार और समाज को इन बच्चों का दायित्व लेना होगा। कोविड के प्रकोप में प्रभावित हुए बच्चे अपने आप को अकेला नहीं समझें। उनकी पूरी चिंता की जाएगी। राज्य सरकार ने प्रत्येक बच्चे के लिए 5 हजार रूपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता, ऐसे बच्चों और उनके संरक्षक को प्रतिमाह नि:शुल्क राशन और पढ़ाई की व्यवस्था की है। समाज भी इस दिशा में आगे आ रहा है। रतलाम में हुई पहल सराहनीय है।

 

इसे भी पढ़ें: मोदी सरकार के 7 वर्ष पूरे होने पर भोपाल में कांग्रेस का धरना

उन्होंने कहा कि  बच्चों की नि:शुल्क पढ़ाई की व्यवस्था की जाएगी। यदि बच्चा नवीं से 12 वीं में निजी स्कूल में पढ़ता है तो साल में एक मुश्त दस हजार रूपये की सहायता दी जायेगी। शासकीय अनुदान प्राप्त कॉलेज में पढ़ने वाले बच्चों की व्यवस्था भी की जाएगी। जो बच्चे जेइई मेन्स परीक्षा या इसी प्रकार की अन्य परीक्षा के द्वारा निजी इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश पाते हैं, उन्हें 1.50 लाख रूपये तक का शुल्क शासन द्वारा प्रदान किया जायेगा। नीट परीक्षा से प्रवेश पर शासकीय और निजी मेडिकल कॉलेजों का पूरा शुल्क राज्य शासन द्वारा वहन किया जायेगा। कामन लॉ एडमीशन टेस्ट के द्वारा या राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित परीक्षा में या दिल्ली विश्वविद्यालय में 12वीं कक्षा के बाद होने वाले एडमीशन में कॉलेजों का समस्त शुल्क राज्य सरकार देगी। पढ़ाई के लिए लेपटॉप या टेबलेट की आवश्यकता होगी तो उसकी व्यवस्था भी की जाएगी।

इसे भी पढ़ें: नाबालिग लड़के से महिला ने बनाए शारीरिक संबंध, पुलिस ने किया मामला दर्ज

अन्य योजनाओं का लाभ भी दिया जायेगा

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि बेटियों की शादी के समय सहायता के संबंध में भी राज्य सरकार विचार करेगी। इसके साथ ही प्रभावित बच्चों को राज्य सरकार की अन्य योजनाओं का लाभ भी दिया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार का 7वाँ वर्ष पूर्ण हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी संवेदनशील प्रधानमंत्री हैं। वे हमारी प्ररेणा हैं। उनके द्वारा इन बच्चों के लिए आरंभ की गई योजना में 10 लाख रूपये कारपस फंड की व्यवस्था है। यह सहायता भी बच्चों को प्राप्त होगी। अत: बच्चों को चिंता की जरूरत नहीं है। वे मेहनत करें, आगे बढ़ें और संकट को पार करते हुए अपने लक्ष्य को प्राप्त करें। मेरी शुभकामनाएं और आशीर्वाद सदैव साथ है। मुख्यमंत्री  चौहान ने जिला कलेक्टर्स को निर्देश दिये कि कोविड के अतिरिक्त अन्य कारणों से माता-पिता या अभिभावक विहीन बच्चों की पहचान की जाए। ऐसे बच्चों को भटकने या गलत हाथों में पड़ने नहीं दिया जायेगा। इन बच्चों की सूची बनाकर उनके रहने, अवास और पढ़ाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

 

इसे भी पढ़ें: मोदी जी के नेतृत्व में भारत निरंतर प्रगति कर रहा- शिवराज सिंह चौहान

मुख्यमंत्री चौहान ने किया बच्चों से संवाद

मुख्यमंत्री चौहान ने योजना से जुड़े 18  वर्ष से अधिक आयु के कुछ बच्चों से वर्चुअली बात की। इनमें भोपाल के दर्पण सोनी, जयंत पठारिया, रतलाम की पल्लवी सोनी, ग्वालियर के धर्मेंद्र आर्य,कुमारी काजल राजे, निवाड़ी के ध्रुव पस्तोर तथा कुमारी नैना पस्तोर शामिल हैं। इसके साथ ही 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के अभिभावकों सतना की श्रीमती गीता चौरसिया, गोरे लाल त्रिपाठी, टीकमगढं के अय्यूब खान, राजेश जैन, तथा ब्रजेश अहिरवार, जबलपुर के  कैलाश सोनी व  देवेन्द्र नायडू, बुरहानपुर के शफीक रहमान तथा प्रवीण बारेला से भी चर्चा की।   





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।