कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष सुरेंद्र चौधरी ने साधा मुख्यमंत्री पर निशाना, कहा कांग्रेस को छोड़ कोरोना की चिंता करें

  •  दिनेश शुक्ल
  •  नवंबर 23, 2020   11:05
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कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष सुरेंद्र चौधरी ने साधा मुख्यमंत्री पर निशाना, कहा कांग्रेस को छोड़ कोरोना की चिंता करें

उन्होंने कहा कि शिवराज सिंह चौहान कोरोना संक्रमण से बचाव के ठोस कदम उठाए न कि कांग्रेस पार्टी व कांग्रेस नेताओं को कोसने के बजाय प्रदेश में कोरोना महामारी के मौजूदा हालात को लेकर विपक्षी दल के आवश्यक सुझावों को अमल में लाएं।

भोपाल। प्रदेश में कोरोना संक्रमितों की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि व लगातार हो रही मौतों को रोकने में शिवराज सरकार के फिसड्डी साबित होने का आरोप लगाते हुए मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री सुरेंद्र चौधरी ने कहा कि सत्ता की भूखी शिवराज सरकार ने माननीय उच्च न्यायालय ग्वालियर के द्वारा कोरोना संक्रमण से आमजनों के बचाव हेतु दिए गए आदेशों का पालन प्रदेश में कराने के वजाय माननीय न्यायालय के आदेश को निरस्त कराने में ज्यादा रुचि ली। परिणाम स्वरूप प्रदेश में कोरोना संक्रमितों की संख्या में लगातार वृद्धि होने के साथ-साथ मौतों के आंकड़े भी बड़े हैं।

 

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उन्होंने अपने बयान में कहा कि राज्य मंत्री परिषद के सदस्य प्रदेशवासियों को कोरोना संक्रमण से बचाव व मौतें रोकने के लिए ठोस कदम उठाने के बजाय जीत का जश्न मनाने में जुटे हुए हैं। जो भाजपा सरकार की असंवेदनशीलता को उजागर करता है। सुरेंद्र चौधरी ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा पत्रकार वार्ता में कांग्रेस नेताओं पर दिए गए उनके बयान पर पलटवार करते हुए  सुरेन्द्र चौधरी न कहा कि प्रदेश में फैली बेरोजगारी और लाखों परिवारों की राशन पर्चियां बंद कर उन्हें खाद्यान्न से वंचित कर दिया गया। उन्होंने कहा कि शिवराज सिंह चौहान कोरोना संक्रमण से बचाव के ठोस कदम उठाए न कि कांग्रेस पार्टी व कांग्रेस नेताओं  को कोसने के बजाय प्रदेश में कोरोना महामारी के मौजूदा हालात को लेकर विपक्षी दल के आवश्यक सुझावों को अमल में लाएं।





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।


SC ने आरक्षण के मुद्दे पर राज्यों से मांगा जवाब, 15 मार्च से होगी सुनवाई

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मार्च 8, 2021   18:49
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SC ने आरक्षण के मुद्दे पर राज्यों से मांगा जवाब, 15 मार्च से होगी सुनवाई

न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वह इस मुद्दे पर भी दलीलें सुनेगी कि क्या इंदिरा साहनी मामले में 1992 में आए ऐतिहासिक फैसले, जिसे ‘मंडल फैसला’ के नाम से जाना जाता है, उस पर पुन: विचार करने की आवश्यकता है।

नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने राज्यों से इस ‘अति महत्वपूर्ण’ सवाल पर जवाब मांगा कि क्या विधायिका किसी विशेष जाति को आरक्षण देने के लिए सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा घोषित करने में सक्षम है। उच्चतम न्यायालय राष्ट्रपति द्वारा तैयार की गई सूची में नामित एक विशेष समुदाय को आरक्षण देने संबंधी संविधान के 102वें संशोधन की व्याख्या के सवाल पर विचार करेगा। संविधान के 102वें संशोधन की व्याख्या का मुद्दा मराठा आरक्षण कानून की वैधता पर याचिकाओं पर गौर करते समय पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के समक्ष उठा था और कानूनी मुद्दा यह है कि क्या किसी राज्य की विधायिका किसी विशेष जाति को आरक्षण देने के लिए सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े घोषित करने में सक्षम है। 

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न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वह इस मुद्दे पर भी दलीलें सुनेगी कि क्या इंदिरा साहनी मामले में 1992 में आए ऐतिहासिक फैसले, जिसे ‘मंडल फैसला’ के नाम से जाना जाता है, उस पर पुन: विचार करने की आवश्यकता है। उच्चतम न्यायालय ने 1992 में अधिवक्ता इंदिरा साहनी की याचिका पर ऐतिहासिक फ़ैसला सुनाते हुए जाति-आधारित आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत तय कर दी थी। पीठ में न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर, न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति आर रवीन्द्र भट्ट शामिल हैं। पीठ ने कहा कि वह अगले सोमवार से सुनवाई शुरू करेगा। पीठ ने राज्यों से इस मुद्दे पर लिखित जवाब दाखिल करने को कहा। उसने कहा, ‘‘प्रत्येक राज्य के स्थायी वकील को नोटिस दिये जायेंगे।’’

महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं मुकुल रोहतगी, कपिल सिब्बल और पी एस पटवालिया की उस दलील पर पीठ ने गौर किया कि 102 वें संशोधन की व्याख्या के सवाल पर फैसला राज्यों के संघीय ढांचे को प्रभावित कर सकता है और इसलिए, उन्हें सुनने की जरूरत है। केन्द्र की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि 102 वें संशोधन की व्याख्या पर अदालत के फैसले से राज्य प्रभावित हो सकते हैं और यह बेहतर होगा कि सभी राज्यों को नोटिस जारी किए जाएं।

उच्चतम न्यायालय ने पांच फरवरी को कहा था कि शिक्षा एवं नौकरियों में मराठा समुदाय को आरक्षण देने से संबंधित महाराष्ट्र के 2018 के कानून को लेकर दाखिल याचिकाओं पर वह आठ मार्च से अदालत कक्ष के साथ ही ऑनलाइन सुनवाई शुरू करेगा। मामले की सुनवाई की तारीख तय करने वाली पीठ ने कहा था कि वह 18 मार्च को मामले की सुनवाई पूरी कर लेगी। पिछले साल नौ दिसंबर को शीर्ष अदालत ने कहा था कि महाराष्ट्र के 2018 के कानून से जुड़े मुद्दों पर ‘‘अविलंब सुनवाई’’ की जरूरत है क्योंकि कानून स्थगित है और लोगों तक इसका ‘फायदा’ नहीं पहुंच पा रहा है। नौकरियों और दाखिले में मराठा समुदाय के लोगों को आरक्षण प्रदान करने के लिए सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग (एसईबीसी) कानून, 2018 को लागू किया गया था।





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नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।


एंटीलिया केस की जांच NIA को सौंपने पर अनिल देशमुख का तंज, सुशांत सिंह मामले को लेकर कही ये बात

  •  अभिनय आकाश
  •  मार्च 8, 2021   18:26
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एंटीलिया केस की जांच NIA को सौंपने पर अनिल देशमुख का तंज, सुशांत  सिंह मामले को लेकर कही ये बात

अनिल देशमुख ने कहा कि अंबानी मामले की जांच महाराष्ट्र पुलिस, एटीएस बहुत अच्छे से कर रही थी लेकिन आज इसकी जांच एनआईए ने लिया है, जांच लेने का उनका अधिकार है लेकिन मनसुख हिरेन मामले की जांच और गाड़ी जो चोरी हुई उसकी जांच एटीएस कर रही है।

कारोबारी मुकेश अंबानी के घर के पास खड़ी कार में विस्फोटकों की  बरामदगी मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए करेगी। एनआईए द्वारा मामले में फिर से केस दर्ज किया जाएगा। वहीं मामले को लेकर महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख का बयान सामने आया है। अनिल देशमुख ने कहा कि अंबानी मामले की जांच महाराष्ट्र पुलिस, एटीएस बहुत अच्छे से कर रही थी लेकिन आज इसकी जांच एनआईए ने लिया है, जांच लेने का उनका अधिकार है लेकिन मनसुख हिरेन मामले की जांच और गाड़ी जो चोरी हुई उसकी जांच एटीएस कर रही है।

सुशांत मामले पर किया तंज

महाराष्ट् के गृह मंत्री ने मुकेश अंबानी के घर के पास बम विस्फोटक कार मामले पर कहा कि जांच एटीएस कर रही थी लेकिन आज इसकी जांच एनआईए ने लिया है। पहले भी सुशांत मामले की जांच मुंबई पुलिस बहुत अच्छे से कर रही थी लेकिन उसकी जांच बाद में सीबीआई ने लिया। लेकिन सीबीआई अभी तक ये नहीं बता पाई कि वो हत्या थी या आत्महत्या।

केंद्र को लगता है हमारे राज्य में कोई व्यवस्था नहीं

मामले पर राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि हमलोग दादरा नगर हवेली के सांसद मोहन डेलकर की मौत मामले की भी जांच कर रहे हैं लेकिन केंद्र को लगता है कि हमारे राज्य में कोई व्यवस्था ही नहीं है। उन्हें लगता है कि दूसरे राज्य के मामले सुलझाने की ताकत केवल उनमें है। 





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तृणमूल कांग्रेस को अलविदा कहने की लगी होड़ ! अब 5 विधायकों ने ली भाजपा की सदस्यता

  •  अनुराग गुप्ता
  •  मार्च 8, 2021   17:46
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तृणमूल कांग्रेस को अलविदा कहने की लगी होड़ ! अब 5 विधायकों ने ली भाजपा की सदस्यता

तृणमूल विधायक सोनाली गुहा, दीपेंदु बिस्वास, रवींद्रनाथ भट्टाचार्य, जटू लहिरी और सरला मुर्मू ने भाजपा का दामन थाम लिया है। इन नेताओं में सबसे चौंका देने वाला नाम सरला मुर्मू का है।

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर तृणमूल कांग्रेस से भाजपा में शामिल होने वाले नेताओं की छड़ी लगी हुई है। तृणमूल कांग्रेस विधायक सोनाली गुहा समेत पांच विधायकों ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की है। बता दें कि इन नेताओं को प्रदेश भाजपा प्रमुख दिलीप घोष, नंदीग्राम से चुनाव लड़ रहे शुभेंदु अधिकारी और वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय की उपस्थिति में भाजपा में शामिल कराया गया। 

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तृणमूल विधायक सोनाली गुहा, दीपेंदु बिस्वास, रवींद्रनाथ भट्टाचार्य, जटू लहिरी और सरला मुर्मू ने भाजपा का दामन थाम लिया है। इन नेताओं में सबसे चौंका देने वाला नाम सरला मुर्मू का है। बता दें कि तृणमूल कांग्रेस ने सरला मुर्मू को हबीबपुर से अपना उम्मीदवार बनाया था लेकिन बाद में उनके स्थान पर पार्टी ने दूसरे उम्मीदवार को खड़ा किया। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा था कि सरला मुर्मू की तबीयत सही नहीं है। जबकि सरला मुर्मू को हबीबपुर से चुनाव लड़ना पसंद नहीं था। 

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टिकट नहीं मिलने भाजपा में आए भट्टाचार्य

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने 5 मार्च दिन शुक्रवार को दोपहर 2 बजे 291 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया। हालांकि उन्होंने 80 साल से अधिक उम्र के नेताओं को टिकट नहीं दिया। जिसके बाद रवींद्रनाथ भट्टाचार्य ने तृणमूल कांग्रेस को अलविदा कहा और भाजपा के साथ आ गए। आपको बता दें कि भट्टाचार्य सिंगूर से तृणमूल का प्रतिनिधित्व करते थे और वह ममता सरकार में मंत्री भी थे।





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