DU ने अदिति और भगिनी निवेदिता कॉलेजों को दी UG प्रवेश में offline दाखिले की अनुमति

दिल्ली विश्वविद्यालय ने अदिति महाविद्यालय और भगिनी निवेदिता कॉलेज को सीयूईटी प्रवेश प्रक्रिया के कई दौर के बाद खाली रही स्नातक सीटों पर मेरिट के आधार पर ऑफलाइन प्रवेश देने की विशेष अनुमति दी है। यह निर्णय हाल के वर्षों में रिक्त रही सीटों को भरने के लिए लिया गया है। इस व्यवस्था के तहत 12वीं के अंकों के आधार पर प्रवेश दिए जा रहे हैं।
नयी दिल्ली, चार अगस्त दिल्ली विश्वविद्यालय ने अपने दो कॉलेजों—अदिति महाविद्यालय और भगिनी निवेदिता कॉलेज को विशेष अनुमति दी है कि वे स्नातक पाठ्यक्रमों की उन रिक्त सीटों पर मेरिट के आधार पर ऑफलाइन प्रवेश दें, जो सीयूईटी आधारित प्रवेश प्रक्रिया के कई दौर पूरे होने के बाद भी खाली रह गई हैं। यह कदम विश्वविद्यालय की ‘ समान विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा’ (सीयूईटी) पर आधारित प्रवेश प्रक्रिया से अलग है, जिसके तहत स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश ‘ समान सीट आवंटन प्रणाली’ (सीएसएएस) के जरिए दिए जाते हैं। भगिनी निवेदिता कॉलेज ने एक अगस्त को परिपत्र जारी कर बीकॉम, बीए, बीएससी और अन्य पाठ्यक्रमों सहित स्नातक में प्रवेश के लिए मेधा आधारित ऑफलाइन प्रवेश के लिए आवेदन आमंत्रित किए।
परिपत्र में कहा गया कि प्रवेश पूरी तरह से 12वीं कक्षा में मिले अंक और सीटों की उपलब्धता के आधार पर होंगे और इसके लिए आवेदन पांच अगस्त तक जमा करने होंगे। दस्तावेजों का सत्यापन और शुल्क भुगतान छह और सात अगस्त को होंगे। कॉलेज प्रशासन ने कहा कि पिछले कुछ सालों में सीएसएएस प्रवेश प्रक्रिया के कई दौर के बाद भी उपलब्ध सीटें नहीं भर पाईं, इसलिए उन्होंने विश्वविद्यालय से विशेष अनुमति मांगी।
बवाना में स्थित अदिति महाविद्यालय ने बताया कि हाल के वर्षों में सीईयूईटी प्रवेश प्रक्रिया के तहत उसकी लगभग 40 प्रतिशत सीटें खाली रही हैं। महाविद्यालय प्रशासन का कहना है कि आस-पास के ग्रामीण इलाकों के कई छात्र, विशेषकर लड़कियां, घर से दूर जाकर पढ़ाई करने की चिंता के कारण सीयूईटी के लिए पंजीकरण नहीं कराते हैं, नतीजतन, 12वीं कक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद कई योग्य उम्मीदवार छूट जाते हैं। विश्वविद्यालय के इस फैसले की भारतीय राष्ट्रीय शिक्षक टीचर्स कांग्रेस (इनटेक) ने आलोचना की है।
संगठन ने कुलपति को पत्र लिखकर विश्वविद्यालय से आग्रह किया है कि वह केवल दो संस्थानों को यह सुविधा देने के बजाय, सभी महाविद्यालयों में स्नातक की खाली सीटों को भरने के लिए एक समान नीति अपनाए।
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