हरियाणा से मध्य प्रदेश पहुंची अहीर रेजिमेंट की मांग, कांग्रेस नेता अरुण यादव ने किया खुला समर्थन

हरियाणा से मध्य प्रदेश पहुंची अहीर रेजिमेंट की मांग, कांग्रेस नेता अरुण यादव ने किया खुला समर्थन

देश के कई हिस्सों से जातिगत रेजिमेंट की मांग उठती रही हैं गुरुग्राम में अहीर रेजिमेंट की मांग को लेकर बीते दिनों धरना प्रदर्शन भी हुआ था जिसके बाद मध्य प्रदेश से भी अहीर रेजीमेंट के गठन की मांग ने बल पकड़ा है।

भोपाल। मध्य प्रदेश में होने जा रहे राज्यसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस आलाकमान पर दवाब बनाने पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अरूण यादव ने भारतीय सेना में अहीर रेजीमेंट बनाए जाने की मांग की है यादव ने इस आशय का एक ट्वीट भी किया है जिसमे उन्होंने यादवों(अहीरों) की वीरता का गुणगान किया है।

आपको बता दें कि देश के कई हिस्सों से जातिगत रेजिमेंट की मांग उठती रही हैं गुरुग्राम में अहीर रेजिमेंट की मांग को लेकर बीते दिनों धरना प्रदर्शन भी हुआ था जिसके बाद मध्य प्रदेश से भी अहीर रेजीमेंट के गठन की मांग ने बल पकड़ा है जिसे कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव हवा दे रहे हैं।

अरुण यादव ने यदुवंशियों के साहस और शौर्य का जिक्र करते हुए ट्वीट कर लिखा "वीर अहीरो ने ठाना है अहीर रेजिमेंट बनाना है, वीर थे रणधीर थे वो यदुवंशी धारा के नीर थे, कैसे पीछे हटते वो तो अहीर थे" 'अहीर रेजिमेंट हक है हमारा' दूसरे ट्वीट में यादव ने अहीर रेजीमेंट को इस वर्ग का हक बताते हुए लिखा, "रेजांग ला के अदम्य वीरता और साहस के पर्याय वीर शहीदों को नमन करते हुए उनकी याद में भारतीय सेना में अहीर रेजिमेंट की मांग करता हूं। अहीर-रेजिमेंट-हक-है-हमारा।

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मध्य प्रदेश की सियासत में अरुण यादव के पिता सुभाष यादव बड़ा ओबीसी चेहरा खासकर यादव समाज के अगुवा रहे हैं। सुभाष यादव राज्य के उप मुख्यमंत्री,कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष के साथ किसान और सहकारिता नेता के तौर पर पहचाने जाते रहे है। पिता के समय से ही अरुण सियासत में उतरे और यूपीए 1 सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री रहे इसके साथ ही वह 2014 से 2018 विधानसभा चुनाव के पहले तक लगातार 4.5 वर्षों तक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भी रहे हैं। अरुण के छोटे भाई सचिन यादव कमलनाथ सरकार में कृषि मंत्री रह चुके हैं।

यहीं कारण है कि कमलनाथ के प्रदेश में सक्रिय होने के बाद से नैपथ्य में बैठे अरुण यादव इस मुद्दे के बहाने एकबार फिर समाजजनों के बहाने अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं जिससे वह 2023 के विधानसभा चुनाव और 2024 में प्रमुख भूमिका निभा सकें।

2019 लोकसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में सत्ता में आने पर जाति-आधारित अहीर इन्फैंट्री रेजिमेंट बनाने का वादा किया था जिसके बाद देश मे हर एक जाति के नाम पर रेजिमेंट बनाने की बहस छिड़ गई थी। बीते दिनों गुरुग्राम में अहीर रेजिमेंट की मांग को लेकर यादव समुदाय के लोग 23 मार्च को शहीद-ए-आजम भगत सिंह के शहीदी दिवस पर आयोजित धरने में देशभर से बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए। और गुरुग्राम तक मार्च निकाला गया था अहीर रेजिमेंट की मांग को लेकर लोगों ने जमकर शक्ति प्रदर्शन भी किया था।

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दक्षिण हरियाणा के अहीर समुदाय के नेताओं के समूह 'संयुक्त अहीर रेजिमेंट मोर्चा' के बैनर तले विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस मोर्चे को मार्च 2021 में एक ट्रस्ट के रूप में रजिस्टर्ड किया गया था। मोर्चा के सदस्यों ने 2018 में भी विरोध प्रदर्शन किया था। बाद में कुछ नेताओं के आश्वासन के बाद ये धरना खत्म कर दिया गया था। हरियाणा में यादव यानी अहीर समुदाय काफी प्रभावी है। यहां अहीरवाल इलाके जिसमें रेवाड़ी, गुरुग्राम और महेंद्रगढ़ जिले आते हैं, ये समुदाय राजनीतिक और सामाजिक रूप से काफी असरदार है। आंदोलन की अगुवाई कर रहे अहीर रेजिमेंट मोर्चा का कहना है कि भारतीय सेना में कई जाति-आधारित रेजिमेंट हैं। सेना में अहीरों का बड़ा प्रतिनिधित्व है। इसी आधार पर वो भी अहीरों के लिए एक अलग रेजिमेंट चाहते हैं।

मोर्चा के संस्थापक सदस्य मनोज यादव ने कहा कि अलग अहीर या यादव रेजिमेंट की मांग उनके सम्मान और अधिकारों की लड़ाई है। यह पूरे देश में यादवों के अधिकारों की मांग है। अहीर समुदाय ने सभी युद्धों में बलिदान दिया है और उन्होंने कई वीरता पुरस्कार जीते हैं। 1962 में रेजांग ला की लड़ाई में 120 जवानों में 114 अहीर थे। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अहीरों को अन्य समुदायों की तरह मान्यता नहीं मिली है। सिख, गोरखा, जाट, गढ़वाल और राजपूतों के लिए अलग जाति आधारित रेजिमेंट है। इसीलिए हम सेना में अहीर रेजिमेंट के गठन की मांग करते हैं।

भारतीय सेना में जाति आधारित रेजिमेंट की स्थापना का पुराना इतिहास रहा है इसकी शुरुआत अंग्रेजों के जमाने मे हुई थी अंग्रेज 'फूट डालो राज करो' की नीति के तहत ऐसा करते थे।





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