Etah की अदालत ने 2005 के मोहरपाल हत्याकांड में दो पुलिसकर्मियों को सुनाई Life Imprisonment

उत्तर प्रदेश की एटा अदालत ने वर्ष 2005 के चर्चित मोहरपाल हिरासत में मौत मामले में तत्कालीन दरोगा गजराज सिंह और सिपाही महावीर सिंह को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। विशेष सत्र न्यायाधीश राकेश धर की अदालत ने दोनों दोषियों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अभियोजन के अनुसार पुलिसकर्मी मोहरपाल को गांव से उठाकर जैथरा थाने ले गए थे, जहां मारपीट के कारण उसकी मौत हो गई थी।
एटा की एक अदालत ने 2005 के चर्चित मोहरपाल हत्याकांड में करीब 20 साल बाद फैसला सुनाते हुए दो तत्कालीन पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिया और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनायी है। अदालत ने तत्कालीन दरोगा गजराज सिंह और सिपाही महावीर सिंह को भारतीय दंड संहिता (भादंसं) की धारा 302/34 के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई है और प्रत्येक पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, मोहरपाल को पुलिसकर्मी गांव से पकड़कर थाना जैथरा ले गए थे जहां कथित तौर पर उसके साथ मारपीट की गई जिसके बाद पुलिस हिरासत में उसकी मौत हो गई।
सुनवाई के दौरान अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर माना कि पुलिसकर्मियों द्वारा मोहरपाल को थाने ले जाने, हिरासत में मारपीट करने और घटना से जुड़े साक्ष्य मिटाने का प्रयास किए जाने का मामला साबित हुआ। मामले में तत्कालीन थाना प्रभारी मनीष यादव और सिपाही मिठाई लाल भी आरोपी बनाए गए थे, लेकिन मुकदमे की सुनवाई के दौरान दोनों की मृत्यु हो गई। विशेष सत्र न्यायाधीश राकेश धर ने गजराज सिंह और महावीर सिंह को दोषी ठहराया।
दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया।
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