Supreme Court का SIR पर फैसला अलोकतांत्रिक, पूर्व न्यायाधीश V Gopala Gowda ने रद्द करने की मांग उठाई

Supreme Court का SIR पर फैसला अलोकतांत्रिक, पूर्व न्यायाधीश V Gopala Gowda ने रद्द करने की मांग उठाई
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उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश वी. गोपाल गौड़ा ने निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण की संवैधानिक वैधता बनाए रखने वाले शीर्ष अदालत के निर्णय को गैर-कानूनी करार दिया है। बेंगलुरु में एक प्रदर्शन के दौरान उन्होंने इस फैसले को तुरंत रद्द करने और चुनाव आयोग से सभी दस्तावेज मंगाने का आग्रह किया।

नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश वी. गोपाल गौड़ा ने बृहस्पतिवार को कहा कि निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखने वाले शीर्ष अदालत के फैसले को रद्द किया जाना चाहिए, क्योंकि यह ‘‘गैर-कानूनी, गैर-संवैधानिक और अलोकतांत्रिक’’ है। पूर्व न्यायाधीश ने यह भी कहा कि शीर्ष अदालत को निर्वाचन आयोग से सभी दस्तावेज मंगाने चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि एसआईआर का निर्णय दोनों निर्वाचन आयुक्तों की सहमति और मंजूरी से लिया गया था या नहीं। उनकी यह टिप्पणी उसी दिन आई, जब 42 सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के एक समूह ने एसआईआर का बचाव करते हुए इसे ‘कानूनी प्रक्रिया’ बताया था।

न्यायमूर्ति गौड़ा ने बेंगलुरु में कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) द्वारा मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने के विरोध में आयोजित प्रदर्शन में कहा, ‘‘एसआईआर की संवैधानिक वैधता को सही ठहराने वाला उच्चतम न्यायालय का 27 मई का फैसला गैर-कानूनी और अलोकतांत्रिक है, जिसे तुरंत रद्द किया जाना चाहिए।’’ उच्चतम न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश उज्जल भुइयां की हालिया टिप्पणी का समर्थन करते हुए न्यायमूर्ति गौड़ा ने कहा कि मतदाताओं को बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित करने के खिलाफ आवाज उठाकर उन्होंने कोई न्यायिक मर्यादा नहीं तोड़ी है। न्यायमूर्ति भुइयां ने रविवार को कहा था कि लाखों नागरिकों को मताधिकार से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ है।

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