Amitabh Bachchan के 84वें जन्मदिन पर Imtiaz Ali ने की तारीफ, लातूर के स्कूल में विशेष उत्सव

फिल्म निर्माता इम्तियाज अली ने अमिताभ बच्चन के 84वें जन्मदिन पर उनके अद्वितीय योगदान की सराहना करते हुए उनके साथ काम करने की उम्मीद जताई। वहीं महाराष्ट्र के लातूर स्थित डॉ हरिवंश राय बच्चन विद्यालय में इस अवसर पर 'मधुशाला से ज्ञानशाला' पहल के तहत सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
फिल्म निर्माता इम्तियाज अली ने कहा कि अमिताभ बच्चन जैसा दूसरा कोई नहीं हो सकता। वह खुद को भाग्यशाली मानते हैं कि उनका जन्म ऐसे दौर में हुआ, जिसे इस दिग्गज अभिनेता ने अपनी पहचान दी है। उन्हें उम्मीद है कि किसी दिन उन्हें अमिताभ बच्चन के साथ किसी फिल्म में काम करने का मौका मिलेगा।
भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में से एक अमिताभ बच्चन ने पांच दशक से अधिक लंबे करियर में अपनी अलग पहचान बनाई है। वह रविवार को 84 वर्ष के हो गए। इम्तियाज अली ने पीटीआई-से कहा, “अमिताभ बच्चन जैसा कोई नहीं है और न ही कभी होगा।
मैं खुद को उन लोगों में शामिल करूंगा, जिनका जन्म भारत में अमिताभ बच्चन के दौर में हुआ है।” पचपन-वर्षीय फिल्म निर्माता ने कहा कि शुरुआत में उन्हें लगता था कि वह कभी इस दिग्गज अभिनेता के साथ काम नहीं कर पाएंगे, क्योंकि उनका कद बहुत बड़ा है। हालांकि, एक विज्ञापन फिल्म का निर्देशन करने के बाद उनकी यह धारणा बदल गई। इस बीच, महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाके में कवि डॉ. हरिवंश राय बच्चन के नाम पर बने एक स्कूल ने रविवार को महानायक अमिताभ बच्चन के जन्मदिन को कविता, संगीत और शिक्षा के उत्सव में बदल दिया।
यह आयोजन “मधुशाला से ज्ञानशाला” नामक पहल के तहत किया गया। लातूर के अहमदपुर स्थित डॉ. हरिवंश राय बच्चन विद्यालय में बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन का 84वां जन्मदिन केक काटकर या मोमबत्तियां जलाकर नहीं, बल्कि साहित्य, रचनात्मकता और नवाचार के मेल वाले आयोजन के साथ मनाया गया। सरकार से सहायता प्राप्त इस स्कूल के संस्थापक निवृत्ति यादव ने पीटीआई-को बताया कि बच्चों ने अपनी आवाज में डॉ. हरिवंश राय बच्चन की कविताओं को संगीतबद्ध करके रिकॉर्ड किया और नृत्य भी प्रस्तुत किया।
इस तरह पूरे आयोजन को जीवंत उत्सव का रूप दिया गया। उन्होंने बताया कि ‘मधुशाला से ज्ञानशाला’ पहल के तहत स्कूल की 20वीं वर्षगांठ भी मनाई गई। इस आयोजन में जन्मदिन समारोह के साथ ग्रामीण स्कूली बच्चों के बीच हिंदी साहित्य, रचनात्मकता और डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने का प्रयास भी शामिल था।
अन्य न्यूज़













