अपने आप में कई राज छुपाए हुए है कारगिल युद्ध, जानें मुशर्रफ के LoC पार करने से लेकर परमाणु हमले की तैयारी तक की पूरी कहानी

Kargil war
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अभिनय आकाश । Jul 26, 2022 12:32PM
कारगिल की दुर्गम और ऊंची चोटियों में भारतीय जवानों ने जिस साहस और शौर्य का परिचय दिया। इस लड़ाई में भारत के 527 वीर शहीद हुए और एक हजार से भी ज्यादा घायल हुए। इस युद्ध में बड़ी संख्या में रॉकेट और बम का इस्तेमाल किया गया।

आज देश पाकिस्तान पर विजय की 23वीं सालगिरह मना रहा है। 26 जुलाई यह महज एक तारीख नहीं यह दिन है याद दिलाने के लिए कि देश के स्वाभिमान की रक्षा के लिए कुर्बानी क्या होती है। यह दिन है उन तमाम रणबांकुरे के आगे नमन करने का जो अपने आप को वर्दी में बांधकर देश को सुरक्षित फिजाओं में आगे बढ़ने का मौका देते हैं। आज के ही दिन भारत ने पाकिस्तानी सेना और घुसपैठियों को कारगिल से खदेड़ दिया था और टाइगर हिल पर तिरंगा फहरा दिया था। इसी मौके पर आज देश कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक जश्न मना रहा है और शहीदों को याद कर रहा है। उन शहीदों को पूरा देश श्रद्धांजलि दे रहा है जिनके बलिदान की वजह से पाकिस्तान को भारत ने अपनी सीमा से खदेड़ दिया। 

किसने दी थी कारगिल घुसपैठ की पहली जानकारी

ताशी नामग्याल कारगिल के बाल्टिक सेक्टर में अपने नए याक की तलाश कर रहे थे। वे पहाड़ियों पर चढ़-चढ़कर देख रहे थे कि उनका याक कहां खो गया है। इसी दौरान कोशिश करते-करते उन्हें अपना याक नज़र आ गया। लेकिन इस याक के साथ-साथ उन्हें जो नज़र आया उसे कारगिल युद्ध की पहली घटना माना जाता है। उन्होंने कुछ संदिग्ध लोगों को देखा और भारतीय सेना को तत्काल इस बारे में जानकारी दी।

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13 किलोमीटर अंदर तक गए थे मुशर्रफ 

23 साल पहले कारगिल युद्ध में एलओसी से 13 किलोमीटर अंदर तक पाकिस्तान के जनरल परवेज मुशर्रफ आ गए थे।  इस युद्ध के दौरान परवेज मुशर्रफ ने क्य-क्या किया ये पाकिस्तानी सेना के दो बड़े अधिकारियों ने अपनी किताब में भी लिखा। मुशर्रफ का भाषण लिखने वाले कर्नल अश्फाक और आईएसआई एनालिसिस विंग के प्रमुख रहे शाहिद अजीज ने कहा था कि कारगिल में मुशर्रफ ने कई गलतियां की थी। इसके बाद पाक टीवी टैनल को दिए इंटरव्यू में मुशर्रफ ने खुद कबूल किया था।  28 मार्च 1998 को जनरल परवेज मुशर्रफ हेलिकॉप्टर से एलओसी के पार भारतीय सीमा में 11 किमी तक गए। रात भी वहीं गुजारी थी।

परमाणु हमले की तैयारी में पाक और क्लिटंन का अटल को फोन

1998 में परमाणु परीक्षण करने वाले पाकिस्तान का मनोबल उस वक्त बढ़ा हुआ था। कहा जाता है कि हालात को देखते हुए मुशर्रफ ने परमाणु हमले की तैयारी तक कर दी थी।  25 जुलाई 1999 की बात है। अमेरिका के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने  अटल बिहारी वाजपेयी को रात के करीब 10 बजे  फोन किया। क्लिंटन कहते हैं अटल जी पाकिस्तान ने भारत पर परमाणु हमले की धमकी दी है। एक कठोर स्वर में अटल जी ने कहा- मैं आज बल्कि अभी से भारत की आधी आबादी को खत्म मानता हूं। लेकिन मैं आपको आश्वासन देना चाहूंगा कि पाकिस्तान कल का सूरज नहीं देख पाएगा।  

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भारतीय वायुसेना का ऑपरेशन सफेद सागर

 26 मई को तत्‍कालीन वायुसेना प्रमुख एवाई टिपनिस ने एयर स्‍ट्राइक के आदेश जारी कर दिए। भारतीय वायुसेना के जवानों की ऑपरेशन सफेद सागर शुरू किया। इस बमबारी ने पूरे कारगिल को थर्रा दिया। पाकिस्तानी घुसपैठियों को ये एहसास करा दिया कि वो भले ही ऊंचाई पर बैठे हो, लेकिन वायुसेना के गोलों से दूर नहीं। इस युद्ध में पाक सैनिकों के खिलाफ मिग-27 और मिग-29 का इस्तेमाल किया था। भारतीय वायुसेना के 60 दिन तक चलने वाले 'ऑपरेशन सफेद सागर' में करीब 300 विमानों ने 6500 बार उड़ान भरी। आईएएफ के फाइटर जेट्स ने 1235 मिशन उड़ानें भरीं और 24 बड़े टारगेट को निशाना बनाया।

दो लाख पचास हजार गोले दागे गए

 कारगिल की दुर्गम और ऊंची चोटियों में भारतीय जवानों ने जिस साहस और शौर्य का परिचय दिया। इस लड़ाई में भारत के 527 वीर शहीद हुए और एक हजार से भी ज्यादा घायल हुए। इस युद्ध में बड़ी संख्या में रॉकेट और बम का इस्तेमाल किया गया। इस दौरान करीब दो लाख पचास हजार गोले दागे गए। वहीं 5,000 बम फायर करने के लिए 300 से ज्यादा मोर्टार, तोपों और रॉकेट लांचर का इस्तेमाल किया गया। लड़ाई के 17 दिनों में हर रोज प्रति मिनट में एक राउंड फायर किया गया। बताया जाता है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यही एक ऐसा युद्ध था जिसमें दुश्मन देश की सेना पर इतनी बड़ी संख्या में बमबारी की गई थी। 

 

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