परिसीमन आयोग की रिपोर्ट को लेकर जम्मू-कश्मीर में सियासत हुई तेज

परिसीमन आयोग की रिपोर्ट को लेकर जम्मू-कश्मीर में सियासत हुई तेज
ANI

हम आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर को लेकर मार्च 2020 में गठित तीन सदस्यीय परिसीमन आयोग ने अपना कार्यकाल खत्म होने से एक दिन पहले पांच मई को अपने अंतिम आदेश में कश्मीर में विधानसभा सीटों की संख्या 47 जबकि जम्मू में 43 रखने की अनुशंसा की है।

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में परिसीमन आयोग की रिपोर्ट को लेकर राजनीतिक बवाल जारी है। भाजपा ने जहां इस रिपोर्ट का स्वागत किया है तो वहीं विपक्षी कांग्रेस, नेशनल कांफ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी सहित अन्य विपक्षी दलों ने इस रिपोर्ट के खिलाफ संयुक्त संघर्ष शुरू करने की घोषणा की है। यह घोषणा सर्वदलीय संयुक्त मोर्चा (ऑल पार्टीज यूनाइटेड मोर्चा) के बैनर तले इन दलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों की बैठक के बाद की गई। इस संयुक्त मोर्चा में कांग्रेस, नेशनल कांफ्रेंस, पीडीपी के अलावा मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी सहित मिशन स्टेटहुड और देश भगत यादगार कमिटी जैसे सामाजिक संगठन शामिल हैं।

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हम आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर को लेकर मार्च 2020 में गठित तीन सदस्यीय परिसीमन आयोग ने अपना कार्यकाल खत्म होने से एक दिन पहले पांच मई को अपने अंतिम आदेश में कश्मीर में विधानसभा सीटों की संख्या 47 जबकि जम्मू में 43 रखने की अनुशंसा की है। परिसीमन आयोग ने साथ ही जम्मू में छह जबकि कश्मीर में एक अतिरिक्त सीट का और राजौरी और पुंछ को अनंतनाग संसदीय क्षेत्र के अधीन करने का प्रस्ताव रखा है।

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परिसीमन आयोग की इस रिपोर्ट को लेकर जम्मू-कश्मीर में हो रही सियासत के बीच श्रीनगर में प्रभासाक्षी संवाददाता ने भाजपा और विपक्ष के नेताओं से बात की। भाजपा प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने कहा कि आयोग ने सभी क्षेत्रों और समुदायों के साथ न्याय किया है तो वहीं विपक्षी गुपकार गठबंधन के नेता मुजफ्फर शाह ने कहा कि हम परिसीमन आयोग की अंतिम रिपोर्ट को पक्षपाती बताते हुए खारिज करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि परिसीमन आयोग ने भाजपा के इशारे पर यह रिपोर्ट तैयार की है।





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