कोरोना काल में भी जारी है बिहार में राजनीतिक खेल, मांझी के बयान ने बढ़ाई भाजपा की बेचैनी

कोरोना काल में भी जारी है बिहार में राजनीतिक खेल, मांझी के बयान ने बढ़ाई भाजपा की बेचैनी

फिलहाल मांझी के आरोपों पर भाजपा चुप है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल के अलावा किसी और नेताओं ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया है। इसका कारण यह है कि जीतन राम मांझी एनडीए में बड़े दलित चेहरा के रूप में शामिल हैं। मगध और गया क्षेत्र में मांझी की पकड़ अच्छी है।

कोरोना वायरस की वजह से फिलहाल बिहार की राजनीति को लेकर चर्चा बहुत ज्यादा नहीं है। लेकिन यह बात भी सच है कि बिहार एनडीए में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी अब कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ही निशाना साथ रहे हैं। भले ही बिहार में सरकार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में है लेकिन मांझी टीकाकरण को लेकर भी केंद्र की मोदी सरकार से सवाल पूछ रहे हैं। विवाद बढ़ने के बाद मांझी ने अपने ट्वीट को डिलीट तो जरूर कर लिया लेकिन कहीं ना कहीं बिहार की राजनीतिक गलियारों में एक नए चर्चा को जन्म दे दिया है। माना जा रहा है कि नीतीश कुमार मांझी के सहारे ही भाजपा पर दबाव बनाने की कोशिश में लगातार हैं। 

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फिलहाल मांझी के आरोपों पर भाजपा चुप है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल के अलावा किसी और नेताओं ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया है। इसका कारण यह है कि जीतन राम मांझी एनडीए में बड़े दलित चेहरा के रूप में शामिल हैं। मगध और गया क्षेत्र में मांझी की पकड़ अच्छी है। साथ ही साथ मांझी के पार्टी से 4 विधायक भी है। आपको बता दें कि कोरोना टीकाकरण के बाद जो सर्टिफिकेट दिया जा रहा है। उस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर है। मांझी ने इसी तस्वीर को लेकर आपत्ति दर्ज की है। मांझी ने साफ तौर पर कहा कि जब वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट पर प्रधानमंत्री की तस्वीर है तो कोरोना से मरने वालों के डेथ सर्टिफिकेट पर भी उनकी तस्वीर लगाई जानी चाहिए। ऐसी बात है कि मांझी ने ऐसा बयान दिया है जो भाजपा पचा नहीं पा रही है। लेकिन फिलहाल विपक्ष को नया मुद्दा मिल गया है जबकि सत्ता पक्ष सन्नाटे में है।

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बयान पर कुल मिलाकर देखें तो भाजपा के बड़े नेता भी चुप है। सुशील मोदी ने भी अब तक के जीतन राम मांझी के बयान पर कोई वक्तव्य नहीं दिया है। संजय जायसवाल ने भी तीन-चार दिनों से मांझी के बयान पर कोई ट्वीट नहीं किया है। भाजपा की चुप्पी का कारण यह भी है कि बिहार में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर वह फिलहाल बैकफुट पर है। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे भाजपा कोटे से मंत्री हैं। केंद्र में भी भाजपा की सरकार है। ऐसे में सबसे ज्यादा सवाल भाजपा से ही पूछे जा रहे हैं। फिलहाल भाजपा की कोशिश यह है कि वह विपक्ष को कोई नया मुद्दा ना दें।

बिहार सरकार का नया आदेश 

इन सबके बीच बिहार सरकार ने एक आदेश जारी किया है। इस आदेश को लेकर बिहार में राजनीतिक चर्चा गर्म हो गई है। दरअसल, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से आदेश जारी किया गया है जिसमें कहा गया है कि लॉकडाउन में कोई भी मंत्री किसी तरह का दौरा नहीं करेगा और ना ही किसी तरह का निरीक्षण करने जाएगा। आदेश में यह भी कहा गया है कि अगर जरूरत महसूस हुई तो मंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ही समीक्षा मीटिंग कर सकते हैं। यह आदेश ऐसे समय में आया है जब खुद स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे लगातार बिहार का दौरा कर रहे हैं। इसके अलावा भाजपा कोटे से मंत्री और सांसद लगातार बिहार में अस्पतालों का और टीकाकरण केंद्रों का दौरा कर रहे हैं। ऐसी स्थिति उत्पन्न हो रही है कि मंत्री और विधायकों को जवाब देना मुश्किल हो जा रहा है। इसके अलावा भाजपा कोटे की ज्यादातर नेता नीतीश सरकार पर ही निशाना साथ रहे हैं। यही कारण है कि फिलहाल विधायकों और मंत्रियों को बिहार दौरे से रोका गया है।





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