मध्य प्रदेश में कोरोना टेस्टिंग किट की कमी को लेकर राजनीति शुरू, इंदौर और भोपाल सहित अन्य जिलों में टेस्टिंग किट का आभाव

मध्य प्रदेश में कोरोना टेस्टिंग किट की कमी को  लेकर राजनीति शुरू,  इंदौर और भोपाल सहित अन्य जिलों में टेस्टिंग किट का आभाव

वही हाल ही में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद(ICMR) द्वारा भोपाल की किलपेस्ट लैब को कोविड-19 जाँच किट बनाने की मान्यता दी गई है। जिसने एक माह में तीन लाख टेस्टिंग किट तैयार कर देने की बात कही थी। लेकिन इस लैब से अब तक कितनी किट सप्लाई की जा रही है, लेकिन लैब अब यह जानकारी छिपा रहा है

भोपाल। मध्यप्रदेश के इंदौर, भोपाल और उज्जैन शहर कोरोना हॉटस्पॉट बने हुए है। हर दिन यहाँ कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ती जा रही है। वही शुक्रवार को इंदौर संभागायुक्त आकाश त्रिपाठी ने इंदौर शहर में कोरोना टेस्टिंग किट की कमी को लेकर आए बयान के बाद इस पर सियासत शुरू हो गई है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इसे लेकर ट्विट कर इसे गंभीर बात बताया है। कमलनाथ ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि एक तरफ कोरोना महामारी भोपाल-इंदौर में मौते हो रही है, दूसरी तरफ टेस्टिंग किट ही खत्म हो गई। यह चिंताजनक और चौंकाने वाली बात है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले नमूनों की पेडेंसी  बढ़ती जा रही है, ऐसे में टेस्टिंग किट की कमी कोरोना की लड़ाई को प्रभावित करेगी। उन्होनें ट्वीट कर कहा कि जिम्मेदार लोग क्या कर रहे है। टेस्टिंग किट की कमी की जानकारी होने पर भी समय पर कदम क्यों नहीं उठाए गए। उनकी आपूर्ति सुनिश्चित क्यों नहीं की गई। साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस मामले पर सरकार से तुरंत कदम उठाने की मांग की है। 

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इंदौर  देश में कोरोना के बड़े हॉट स्पॉट में शामिल है। जहाँ रह रोज कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही कोविड-19 वायरस के संदिग्ध नमूनों की जांच ने रफ्तार पकड़ी ही थी कि टेस्टिंग किट की कमी के चलते इस पर फिर ब्रेक लगने की आशंका है। है। यही कारण है कि इंदौर की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।  यहां महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज में आरएनए निकालने की ऑटोमैटिक मशीन को शुरू हुए दो दिन ही हुए थे कि किट की कमी आ गई है। यही नहीं ऐसी ही ऑटोमैटिक मशीन एम्स भोपाल के पास भी है और वहां भी किट का टोटा पड़ गया है। ऑटोमैटिक मशीन की किट मंगवाने के लिए प्रशासन पुरजोर कोशिश कर रहा है। इसके लिए प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग से लेकर आइसीएमआर भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद(ICMR)  दिल्ली तक बातचीत की जा रही है। पर चिंता की बात यह है कि मध्य प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र, गुजरात सहित देशभर में इस किट की पूर्ति नहीं हो पा रही है।

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वही हाल ही में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद(ICMR) द्वारा भोपाल की किलपेस्ट लैब को कोविड-19 जाँच किट बनाने की मान्यता दी गई है। जिसने एक माह में तीन लाख टेस्टिंग किट तैयार कर देने की बात कही थी। लेकिन इस लैब से अब तक कितनी किट सप्लाई की जा रही है, लेकिन लैब अब यह जानकारी छिपा रहा है कि वह अब तक कितनी टेस्टिंग किट सप्लाई की जा चुकी है। किलपेस्ट लैब में कार्यरत एक वैज्ञानिक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें इसकी जानकारी देने के लिए मना किया गया है। टेस्टिंग किट की जानकारी देने सरकार की तरफ से मनाही है या फिर लैब इस बारे में कुछ छुपा रहा है, इस पर उन्होनें बताने से मना कर दिया। भोपाल की किलपेस्ट लैब मे निर्मित कोविड-19 किट से किए जाने वाले पीसीआर टेस्ट के जरिए केवल ढाई घंटे में जाँच के परिणाम सामने आने का दावा किया गया था। इस किट की कीमत भी एक हजार रूपए से कम आने की बात भी लैब ने कही थी।

    

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इंदौर शहर में टेस्टिंग किट की कमी हो रही है तो दूसरी तरफ शहर में एक साथ सर्वे और स्क्रीनिंग शुरू होने से दिन करीब 300 नए सैंपल भी आ रहे हैं। ऐसे में प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ लैब में पेंडिंग नमूनों की जांच तीन दिन में निपटाने की चुनौति है तो दूसरी तरफ शहर की 30 लाख की आबादी का सर्वे भी लक्ष्य के साथ तेजी से किया जा रहा है। इंदौर में एमजीएम मेडिकल कॉलेज की लैब में ऑटोमैटिक मशीन तो चालू हो गई, लेकिन किट की कमी के चलते नई समस्या खड़ी हो गई है। इंदौर कमिश्नर  आकाश त्रिपाठी का कहना है कि किट उपलब्ध कराने के लिए चिकित्सा विभाग भोपाल से लेकर भारत सरकार तक हम हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। इंदौर में हमें कुछ दिन लगातार किट की जरूरत होगी। यहां इंदौर के अलावा आसपास के जिलों से भी नमूने जांच के लिए आ रहे हैं।





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