सिद्धू-सचिन और देव के तेवर ने छुड़ाए कांग्रेस के पसीने, कम नहीं हो रही पार्टी की परेशानी

सिद्धू-सचिन और देव के तेवर ने छुड़ाए कांग्रेस के पसीने, कम नहीं हो रही पार्टी की परेशानी

कुल मिलाकर कहें तो तीनों ही राज्यों में मुख्यमंत्री पद को लेकर तनातनी है। सिद्धू भले ही दूसरे पार्टी से आए हैं लेकिन वह चाहते हैं कि उन्हें कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री उम्मीदवार के तौर पर घोषित किया जाए।

कांग्रेस के लिए चुनौतियां खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। पार्टी भले ही सब कुछ ठीक होने का दावा कर रही है लेकिन आलाकमान के सामने चिंता की लकीरें साफ तौर पर दिखाई देने लगी है। वर्तमान में देखें तो कांग्रेस का शासन 3 राज्य में है। यह राज्य है पंजाब, राजस्थान और छत्तीसगढ़। भले ही इन तीनों राज्यों में पार्टी सत्ता में है। लेकिन तीनों ही राज्यों में पार्टी के अंदर की अंर्तकलह लगातार आलाकमान को परेशान कर रहा है। एक गुट दूसरे गुट के खिलाफ लगातार हमलावर है तो दूसरा गुट पहले गुट को लेकर सड़कों पर है। इस तरह की उलझन कांग्रेस के लिए नई समस्या लेकर आई है। पंजाब में यह समस्या एक समय ऐसा लग रहा था कि सुलझ चुका है। लेकिन एक बार फिर यह चरम पर दिखाई देने लगा है। पंजाब को लेकर आलाकमान के सामने चिंता की लकीरें इसलिए भी है क्योंकि वहां अगले साल चुनाव होने हैं। अगर इस तरह की स्थिति पार्टी के अंदर रही तो आने वाले चुनाव में इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ सकता है। राजस्थान में भले ही चुनाव में अब भी वक्त है लेकिन पार्टी के अंदर की गुटबाजी उसे लगातार कमजोर कर रही है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री पद को लेकर दो नेता आपस में लगातार रस्सा कस्सी कर रहे हैं।

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पंजाब में सिद्धू बनाम अमरिंदर

पंजाब में हाल में ही नवजोत सिंह सिद्धू को पार्टी प्रमुख बनाया गया है। सबसे खास बात तो यह है कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के विरोध के बावजूद भी नवजोत सिंह सिद्धू की ताजपोशी हुई। हालांकि अभी भी सिद्धू बनाम अमरिंदर लगातार देखने को मिल रहा है। सिद्धू को लगातार अमरिंदर के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंके हुए हैं। पंजाब के कांग्रेस प्रभारी हरीश रावत लगातार इस झगड़े को सुलझाने की कोशिश में हैं लेकिन यह सुलझने का नाम नहीं ले रहा। टीटू की ताजपोशी के बाद विवाद तब और बढ़ गया जब उनके सलाहकारों ने भारत विरोधी बयान दे दिया जिसके बाद अमरिंदर के साथ-साथ कई और नेता खफा हो गए। वहीं सिद्धू गुट के नेता हरीश रावत से मुलाकात कर अमरिंदर को मुख्यमंत्री पद से हटाने की मांग की थी। हालांकि, रावत की ओर से साफ कह दिया गया कि अमरिंदर के ही नेतृत्व में अगला चुनाव लड़ा जाएगा। अमरिंदर ने भी शक्ति प्रदर्शन करते हुए 60 वर्तमान विधायक और 8 सांसदों के साथ एक बैठक की। 

राजस्थान में गहलोत बनाम पायलट

राजस्थान में कांग्रेस के लिए चुनौतियां खत्म नहीं हो रही है। राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व अध्यक्ष सचिन पायलट के बीच का विवाद सुलझता नजर नहीं आ रहा है। 1 साल से ज्यादा का वक्त हो गया लेकिन अब भी सचिन पायलट खेमा अशोक गहलोत से नाराज बताया जा रहा है। सचिन पायलट कांग्रेस आलाकमान से लगातार मुलाकात कर रहे हैं। लेकिन अशोक गहलोत पायलट समर्थकों को अपने साथ जोड़ने को तैयार नहीं हैं। स्थिति यह हो गई कि दोनों नेताओं ने एक दूसरे के खिलाफ सार्वजनिक बयान देना शुरू कर दिया। अजय माकन और केसी वेणुगोपाल लगातार राजस्थान मसले को सुलझाते हुए नजर आज जरूर रहे हैं लेकिन मामला धीरे-धीरे हाथ से निकलता जा रहा है। 

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छत्तीसगढ़ में उथल-पुथल

छत्तीसगढ़ में भले ही कांग्रेस पूर्ण बहुमत के साथ सरकार में है। कांग्रेस की मजबूत सरकार है। भूपेश बघेल मजबूती के साथ सरकार चला रहे हैं। लेकिन पार्टी के लिए चुनौतियां वहां भी है। माना जा रहा है कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस जब सत्ता में आई थी तब भूपेश बघेल और टीएस सिंह देव के बीच ढाई-ढाई साल का मुख्यमंत्री कार्यकाल तय हुआ था। अब जब भूपेश बघेल का ढाई साल पूरा हो चुका है ऐसे में टीएस सिंह देव लगातार आलाकमान पर दबाव बना रहे हैं। यही कारण है कि आलाकमान भूपेश बघेल और टीएस सिंह देव से लगातार मुलाकात कर रहा है। टीएस सिंह देव के समर्थक विधायक और भूपेश बघेल के समर्थक विधायक दिल्ली में प्रभारी पी एल पुनिया से मुलाकात कर चुके हैं। इसे दोनों नेताओं का शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि ऐसा लग रहा है कि राहुल गांधी से मुलाकात के बाद फिलहाल भूपेश बघेल की कुर्सी बच सकती है। 

कुल मिलाकर कहें तो तीनों ही राज्यों में मुख्यमंत्री पद को लेकर तनातनी है। सिद्धू भले ही दूसरे पार्टी से आए हैं लेकिन वह चाहते हैं कि उन्हें कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री उम्मीदवार के तौर पर घोषित किया जाए। हालांकि कांग्रेस की ओर से इस बात को बार-बार स्वीकार किया जा रहा है कि पंजाब में कैप्टन अमरिंदर का विकल्प फिलहाल कोई नहीं है। वहीं सचिन पायलट राजस्थान में अशोक गहलोत को ज्यादा महत्व देने से नाराज हैं। इतना ही नहीं सचिन पायलट के समर्थक विधायकों का आरोप है कि गहलोत उन्हें कोई महत्व नहीं देना चाहते। जबकि छत्तीसगढ़ का भी विवाद मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर ही हैं। 





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