ब्लैक फंगस इंजेक्शन न मिलने से भोपाल में छह की मौत, आयोग ने मांगी रिपोर्ट

ब्लैक फंगस इंजेक्शन न मिलने से भोपाल में छह की मौत, आयोग ने मांगी रिपोर्ट
प्रतिरूप फोटो

भोपाल में इस बीमारी के मरीज़ों की संख्या 310 है। हर दिन मरीज़ बढ रहे हैं। एम्स और हमीदिया में मिलाकर 160 मरीज़ भर्ती हैं। निजी अस्पतालों के करीब 140 मरीज़ हैं। सरकारी अस्पतालों को आसानी से इंजेक्शन मिल जा रहे हैं

भोपाल। मध्य प्रदेश मानव अधिकार आयोग ने राजधानी के हमीदिया अस्पताल में शनिवार-रविवार की रात इंजेक्शन न मिलने के कारण ब्लैक फंगस के छह मरीजों की मौत पर संज्ञान लिया है। इस मामले में आयोग ने अपर मुख्य सचिव, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, मंत्रालय, कमिश्नर, भोपाल संभाग तथा कलेक्टर, भोपाल से 31 मई 2021 तक प्रतिवेदन मांगा है।

 

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आयोग ने इन अधिकारियों से यह भी पूछा है कि ब्लैक फंगस के इंजेक्शन की पूर्ति एवं खरीद के बारे में क्या गाइडलाइन या नियम हैं? इन छह मरीज़ों की मौत क्या वास्तव में इंजेक्शन प्रदान नहीं करने की वजह से हुई है? इस बारे में शासन/अधिकारियों द्वारा क्या प्रयास किये गये हैं?  इसके लिये कौन अधिकारी ज़िम्मेदार है ? क्यूं न मृत मरीज़ों के परिजनों को क्षतिपूर्ति दिलाने का नोटिस/आदेश/सिफारिश की जाये ?

 

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मध्य प्रदेश मानव अधिकार आयोग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार भोपाल शहर के हमीदिया अस्पताल में बीते शनिवार की रात से रविवार के बीच छह मरीज़ों की ब्लैक फंगस से मौत हो गई है। इनमें चार को कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद दूसरी दिक्कतें थीं। इसके पहले बीते शुक्रवार को भी चार मरीज़ों की मौत हुई थी। इसके बाद भी हाल यह है कि बीमारी को खत्म करने के लिये ज़रूरी इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा है। दो दिन से इंजेक्शन नहीं आया है। लोग दिनभर मेडिकल स्टोर्स और गांधी मेडिकल कालेज में भटकने के बाद निराश होकर घर लौट जा रहे हैं।

 

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इंजेक्शन के विकल्प के तौर पर पोसोगोनाजोल टैबलेट दी जा रही है, जो इंजेक्शन के मुकाबले उतनी कारगर नहीं है। भोपाल में इस बीमारी के मरीज़ों की संख्या 310 है। हर दिन मरीज़ बढ रहे हैं। एम्स और हमीदिया में मिलाकर 160 मरीज़ भर्ती हैं। निजी अस्पतालों के करीब 140 मरीज़ हैं। सरकारी अस्पतालों को आसानी से इंजेक्शन मिल जा रहे हैं, लेकिन निजी अस्पतालों में भर्ती मरीज़ों को इंजेक्शन नहीं मिलने से उनकी हालत बिगड़ रही है।

 

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एक मरीज़ को रोज़ चार इंजेक्शन की ज़रूरत होती है, इस लिहाज़ से रोज़ाना करीब 600 इंजेशन की ज़रूरत निजी अस्पतालों को है। बीते शुक्रवार को एक निजी मेडिकल स्टोर से 125 इंजेक्शन बांटे गये थे। शनिवार को इंजेक्शन नहीं आये। रविवार को मुंबई से विमान के ज़रिये 100 इंजेक्शन आने वाले थे। इसमें भी देरी हुई, इस वजह से रात नौ बजे तक बागमुगलिया के बायोसेफ मेडिकल स्टोर में कतार से लगे रहने के बाद स्वजन घर चले गये।





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