केंद्र की राजनीति में होगी सुशील मोदी की एंट्री, मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

केंद्र की राजनीति में होगी सुशील मोदी की एंट्री, मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

फिर 2017 में राजनीतिक घटनाक्रम के बाद एक बार फिर वह नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार में उप मुख्यमंत्री बने। जब 2000 में नीतीश कुमार के नेतृत्व में पहली बार बिहार में सरकार बनी थी तब भी सुशील मोदी को मंत्री बनाया गया था। यह सरकार महज 5 दिन ही टिक पाई थी।

नई सरकार में जगह नहीं मिलने के बाद बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के राजनीतिक भविष्य को लेकर तरह-तरह के कयास लगने लगे थे। इसके बाद सुशील मोदी ने भी ट्वीट करते हुए कहा कि उनसे कोई कार्यकर्ता का पद नहीं छीन सकता। लेकिन इस बात के भी कयास लगने लगे थे कि सुशील मोदी को अब केंद्र की राजनीति में लाया जा सकता है। अब यही देखने को भी मिल रहा है। बिहार से राज्यसभा की एकमात्र खाली सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए भाजपा ने सुशील मोदी को अपना उम्मीदवार बनाया है। इसके बाद सुशील मोदी को लेकर अब नई संभावनाएं जताई जा रही हैं। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि अब उन्हें केंद्र सरकार में मंत्री पद भी मिल सकता है।

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सुशील मोदी बिहार की राजनीति में काफी सक्रिय रहे हैं। सन 2000 के बाद की राजनीति में वह बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं। 2005 से 2020 तक वह पार्टी के शीर्ष नेता रहे हैं। सुशील मोदी 1996 से लेकर 2004 तक बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे हैं। 2004 में ही उन्होंने भागलपुर से सांसदी का चुनाव लड़ा और जीता भी। हालांकि 2005 में नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में जब एनडीए की सरकार बनी तो सुशील मोदी उप मुख्यमंत्री बने। 2005 से लेकर 2013 तक वह लगातार बिहार सरकार में उपमुख्यमंत्री बने रहें। फिर 2017 में राजनीतिक घटनाक्रम के बाद एक बार फिर वह नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार में उप मुख्यमंत्री बने। जब 2000 में नीतीश कुमार के नेतृत्व में पहली बार बिहार में सरकार बनी थी तब भी सुशील मोदी को मंत्री बनाया गया था। यह सरकार महज 5 दिन ही टिक पाई थी।

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सुशील मोदी छात्र आंदोलन से निकले नेता हैं। लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार, रविशंकर प्रसाद और सुशील मोदी जयप्रकाश आंदोलन के समय संघर्ष करने वाले नेताओं में से हैं। सुशील मोदी ने छात्र राजनीति भी की है। वह 10 साल की उम्र में संघ के स्वयंसेवक बन गए थे। उसके बाद लगातार वह जमीन पर संघर्ष करते रहे। 1973 में जब लालू प्रसाद यादव पटना यूनिवर्सिटी के छात्र संघ के अध्यक्ष थे तब सुशील मोदी इसके सचिव थे। छात्र आंदोलन के समय उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। 1990 में उन्होंने पहली बार चुनाव लड़ा और पटना सेंट्रल सीट से विधायक बने। इसी सीट से 1995 और 2000 में भी चुनाव जीतकर विधायक बने। 2005 के बाद से बिहार में नीतीश कुमार और सुशील मोदी की जोड़ी को राम-लक्ष्मण की जोड़ी के रूप में देखा जाता रहा है। दोनों ने लगभग 12 साल तक मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री रहते हुए बिहार में काम किया है।

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सुशील मोदी की यूसपी लालू परिवार के खिलाफ संघर्ष रहा है। सड़क से लेकर सदन तक के लगातार लालू परिवार के खिलाफ संघर्ष करते रहे हैं जिसमें उन्हें एक कामयाबी भी मिली है। चारा घोटाला हो या फिर आईआरसीटीसी मामला, सभी मुद्दों को सुशील मोदी ने गंभीरता से उठाया और इन मामलों को लेकर लालू परिवार की मुश्किलें भी बड़ी है। फिलहाल चारा घोटाला मामले में लालू प्रसाद यादव जेल में बंद है। हालांकि समय समय पर बिहार भाजपा के कुछ नेताओं में सुशील मोदी को लेकर नाराजगी भी दिखती थी। सुशील मोदी पर यह भी आरोप लगा कि वह इतने सालों तक नीतीश कुमार के पिछलग्गू बने रहे। भाजपा को बिहार में वह मजबूत नहीं कर सके। हालांकि, केंद्रीय नेतृत्व का उन्हें हमेशा समर्थन प्राप्त रहा। अरुण जेटली जैसे नेताओं के वह काफी करीबी भी माने जाते हैं। उन्हें जीएसटी काउंसिल का अध्यक्ष भी बना दिया गया था। फिलहाल अब जब केंद्र की राजनीति में सुशील मोदी जा रहे हैं तो सबकी निगाहें इस बात पर ही टिकी होगी कि आखिर उन्हें कौन सा मंत्रालय दिया जाता है। 





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