महाराष्ट्र स्थानीय निकाय चुनाव: 12 जिला परिषदों, 125 पंचायत समितियों के लिए मतदान शुरू, 7438 उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर

इस चुनाव में 731 जिला परिषद सीट और 1,462 पंचायत समिति सीट के लिए कुल 7,438 उम्मीदवार मैदान में हैं। इस चुनाव में दो करोड़ से अधिक पात्र मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकते हैं।
महाराष्ट्र के राजनीतिक परिदृश्य के लिए आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्य के 12 जिलों की 12 जिला परिषदों और 125 पंचायत समितियों के लिए शनिवार सुबह साढ़े सात बजे से मतदान की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह चुनाव न केवल स्थानीय प्रशासन की दिशा तय करेंगे, बल्कि आगामी बड़े चुनावों के लिए भी एक लिटमस टेस्ट साबित होंगे।
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इस चुनाव में 731 जिला परिषद सीट और 1,462 पंचायत समिति सीट के लिए कुल 7,438 उम्मीदवार मैदान में हैं। इस चुनाव में दो करोड़ से अधिक पात्र मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकते हैं। रायगढ़, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, पुणे, सातारा, सांगली, सोलापुर, कोल्हापुर, छत्रपति संभाजीनगर, परभणी, धाराशिव और लातूर की जिला परिषदों तथा उनके अंतर्गत आने वाली पंचायत समितियों में प्रतिनिधि चुनने के लिए मतदान हो रहा है।
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मतदान सुबह साढ़े सात बजे शुरू हुआ और शाम साढ़े पांच बजे तक जारी रहेगा। मतगणना नौ फरवरी को सुबह 10 बजे से शुरू होगी, जिसके बाद आदर्श आचार संहिता हटा ली जाएगी। यह मतदान मूल रूप से पांच फरवरी को होना था, लेकिन 28 जनवरी को उपमुख्यमंत्री अजित पवार की विमान दुर्घटना में मृत्यु और इसके बाद तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था। कुल 2,624 उम्मीदवार 731 जिला परिषद सीट के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। इनमें 369 सीट महिलाओं के लिए, 83 अनुसूचित जाति, 25 अनुसूचित जनजाति और 191 अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षित हैं।
इसी तरह 4,814 उम्मीदवार 1,462 पंचायत समिति सीट के लिए मैदान में हैं। इनमें 731 सीट महिलाओं के लिए, 166 अनुसूचित जाति, 38 अनुसूचित जनजाति और 342 ओबीसी के लिए आरक्षित हैं। मतदाता सूची में 1,06,33,269 पुरुष, 1,01,86,965 महिलाएं और अन्य श्रेणी के 468 मतदाता शामिल हैं। कुल 25,471 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। चुनाव ड्यूटी के लिए लगभग 1.28 लाख कर्मियों को तैनात किया गया है।
अजित पवार के निधन के कारण टला था चुनाव
उल्लेखनीय है कि यह मतदान पहले 5 फरवरी को होना था। हालांकि, 28 जनवरी को उपमुख्यमंत्री अजित पवार की एक दुखद विमान दुर्घटना में मृत्यु और उसके बाद घोषित तीन दिवसीय राजकीय शोक के कारण प्रशासन ने चुनाव को स्थगित करने का निर्णय लिया था।
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