आखिर सुर्खियों में क्यों हैं प्रफुल्ल पटेल, जानें पूरा कारण

By अंकित सिंह | Publish Date: Jun 6 2019 3:21PM
आखिर सुर्खियों में क्यों हैं प्रफुल्ल पटेल, जानें पूरा कारण
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चुनावी मौसम में सियासी समीकरण को भांपते हुए अनवर ने तो अपना पाला बदल लिया पर प्रफुल्ल पटेल शरद पवार के साथ बने हुए हैं और आजकल सुर्खियों में भी हैं। अगर कोई नेता सुर्खियों में आए तो कई तरह के संशय आपके मन में तैरने लगते हैं।

शरद पवार के बाद NCP में रहते हुए जिन नेताओं ने राष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाया वह हैं प्रफुल्ल पटेल और तारिक अनवर। दोनों नेता शरद पवार के काफी करीब भी थे और यही कारण रहा कि दोनों मनमोहन सिंह की सरकार में मंत्री भी बनाएं गए। प्रफुल्ल पटेल ने जहां नागर विमानन मंत्रालय का कार्यभार देखा तो अनवर ने कृषि मंत्रालय में अपना योगदान दिया। हालांकि चुनावी मौसम में सियासी समीकरण को भांपते हुए अनवर ने तो अपना पाला बदल लिया पर प्रफुल्ल पटेल शरद पवार के साथ बने हुए हैं और आजकल सुर्खियों में भी हैं। अगर कोई नेता सुर्खियों में आए तो कई तरह के संशय आपके मन में तैरने लगते हैं। 

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चलिए, सबसे पहले आपको यह बता देते हैं कि मामला क्या है? मामला यह है कि प्रवर्तन निदेशालय ने तीन अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस के साथ एयर इंडिया के लाभदायक मार्गों के बंटवारे में कथित अनियमितताओं के संबंध में 6 जून को अपने बयान दर्ज करने के लिए पूर्व नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल को तलब किया था। इसके अलावा यूपीए सरकार में उनके कार्यकाल के दौरान 43 एयरबस विमानों की खरीद भी सवालों के घेरे में है। प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार पटेल पर आरोप है कि वे मामले के मुख्य आरोपी दीपक तलवार और उसके बेटे आदित्य के संपर्क में थे। तलवार ने विमानन मंत्रालय में अपने संपर्कों का इस्तेमाल कर विदेशी एयरलाइन कंपनियों को फायदा पहुंचाया था। जिसके बदले उसे बड़ी रकम मिली थी। चार्जशीट में जांच एजेंसी ने तलवार और पूर्व केंद्रीय मंत्री के कार्यालय के बीच ई-मेल के जरिए बातचीत का भी उल्लेख किया है। इन अनियमितताओं के कारण सरकारी कंपनी एयर इंडिया को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। 
जब आरोप लग गए तो प्रफुल्ल पटेल का जवाब तो आना ही थी। पटेल ने कहा कि उन्हें विमानन उद्योग की जटिलताओं को समझने के लिए ईडी का सहयोग करके उन्हें खुशी होगी। मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली UPA सरकार में हुए करोड़ों रुपये के कथित विमानन घोटाले के सिलसिले में किसी बड़े नेता के खिलाफ इसे पहली कार्रवाई माना जा रहा है। हालांकि 2004 से 2011 के बीच नागरिक उड्डयन मंत्री रहे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) नेता के नाम का उल्लेख आरोपी के तौर पर नहीं किया गया है। अब यह देखना होगा कि प्रफुल्ल पटेल से किस तरीके की पूछताछ होती है और वह अपने दावे के अनुसार जांच एजेंसी को कितना सहयोग कर पाते हैं। साथ ही साथ यह भी देखने वाली बात होगी कि वह बाद में इसे राजनीति से प्रेरित तो नहीं बता रहें। 
गुजरात के नदीयाद में जन्मे प्रफुल्ल पटेल फिलहाल महाराष्ट्र से राजयसभा सांसद हैं। उनके पिता भी राजनीति में थे। नगर पालिका परिषद से अपनी राजनीति की शुरूआत करने वाले पटेल 1991 में पहली बार कांग्रेस की टिकट पर सांसद बनें। 1996 और 1998 के चुनाव में भी वह जीते और सांसद बनें। सन् 2000 में वह पहली बार राज्यसभा पहुंचे। इससे पहले वह मंत्रिमंडल की विभिन्न समितियों के सदस्य भी रहे। 2009 में वह फिर से लोकसभा पहुंचे और मंत्री बन गए। वह 2012 से अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) के लिए भारत की एसोसिएशन फुटबॉल गवर्निंग बॉडी के अध्यक्ष हैं। वह 2015 एशियाई फुटबॉल परिसंघ के उपाध्यक्ष बने। दिसंबर 2016 में उन्हें एशियाई फुटबॉल परिसंघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था। 2017 में प्रफुल्ल पटेल चार साल की अवधि के लिए फीफा वित्त समिति के सदस्य बने।  

 


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