संवाद से ही सुलझेगा युवा असंतोष
20 जुलाई को ‘चलो संसद’ के दौरान जो कुछ हुआ, उसने इस पूरे संकट को और गहरा कर दिया। युवाओं पर बल प्रयोग, उन्हें रोकने के लिए कठोर उपाय और उनके आक्रोश को नियंत्रित करने की कोशिशें यह दर्शाती हैं कि सरकार समस्या के मूल कारणों को समझने के बजाय उसके लक्षणों से लड़ रही है।



























































