राजनीति सनातन विरोध की बजाय आममुद्दों पर केंद्रित हो
यह भी सत्य है कि अनेक विपक्षी दल स्वयं को सनातन विरोधी नहीं, बल्कि सामाजिक कुरीतियों, जातिवाद और भेदभाव के विरोधी बताते हैं। उनका तर्क है कि वे सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों की बात करते हैं। यह दृष्टि लोकतंत्र में स्वीकार्य है, क्योंकि हर परंपरा में आत्मसमीक्षा और सुधार की आवश्यकता होती है।



























































