Ramazan 2024 । पवित्र महीने के दौरान इस्लामी नियमों का पालन करना जरुरी, जानें रमजान में क्या करें और क्या नहीं

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Prabhasakshi
एकता । Mar 12 2024 2:07PM

पवित्र महीने को रोजा, प्रार्थना, चिंतन और दान के कार्यों से चिह्नित किया जाता है। दुनिया भर के मुसलमानों के लिए ये आध्यात्मिक विकास और आत्म-अनुशासन का समय होता है। इसलिए रमजान के महीने के दौरान मुसलामानों को कुछ प्रथाओं और सिद्धांतों का पालन करना पड़ता है।

रमजान का पवित्र महीना इस्लामी कैलेंडर में एक महत्वपूर्ण समय है, जो 12 मार्च से शुरू हो गया है। इस पवित्र महीने को रोजा, प्रार्थना, चिंतन और दान के कार्यों से चिह्नित किया जाता है। दुनिया भर के मुसलमानों के लिए ये आध्यात्मिक विकास और आत्म-अनुशासन का समय होता है। इसलिए रमजान के महीने के दौरान मुसलामानों को कुछ प्रथाओं और सिद्धांतों का पालन करना पड़ता है। चलिए ऐसे में जानते हैं पवित्र महीने के दौरान लोगों को क्या करना चाहिए और क्या करने से बचना चाहिए।

पवित्र महीने के दौरान क्या करें?

रोजा रखें- इस्लामी परंपरा के अनुसार, पवित्र महीने में सुबह से सूर्यास्त तक मुसलमानों को रोजा रखना चाहिए। ये लोगों को आत्म-नियंत्रण और आत्म-अनुशासन सिखाता है। रोजे के दौरान पेय, धूम्रपान और वैवाहिक संबंधों से परहेज करना जरुरी है। इसके अलावा साथी मुसलमानों के बीच एकता और एकजुटता को बढ़ावा देने के लिए सामुदायिक इफ्तार (रोजा तोड़ना) और समारोहों में भाग लें।

अल्लाह से प्रार्थना करें- रमजान के महीने के दौरान सभी मुसलमानों को इबादत बढ़ानी चाहिए। मुसलमानों के लिए पवित्र महीने में दिन में पांच बार नमाज़ अदा करना या सलात पढ़ना जरुरी होता है।

कुरान पढ़ें- रमजान के महीने में कुरान की आयतों को पढ़ने और उन पर विचार करने के लिए प्रत्येक दिन समय समर्पित करें। इसके अलावा आत्म-चिंतन, आत्मनिरीक्षण और पिछले गलत कार्यों के लिए क्षमा मांगने के लिए समय निकालें। 

दान करें- रमजान के महीने में जरूरतमंदों की मदद करें। दूसरों के प्रति धैर्य, दया और करुणा का अभ्यास करें, विशेष रूप से निराशा या थकान के क्षणों के दौरान।

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पवित्र महीने के दौरान क्या न करें?

नकारात्मक भाषण और व्यवहार- रमजान के पवित्र महीने में नकारात्मक भाषण, गपशप, या दूसरों के प्रति हानिकारक व्यवहार में शामिल होने से बचें। इसके अलावा फिजूलखर्ची और अपव्यय से बचें, संसाधनों का बुद्धिमानी से उपयोग करें और कम भाग्यशाली लोगों के प्रति सचेत रहें।

ज्यादा भोजन खाने से बचें- सहरी और इफ्तार के दौरान अधिक खाना कहने से परहेज करें। पूरे दिन रोजा रखने के लिए भोजन और पेय के सेवन करने में संयम बनाए रखना जरुरी है।

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