Prabhasakshi NewsRoom: Rahul Gandhi के 'विश्वासघात' वाले बयान पर भड़की DMK ने Congress को बताया 'जहरीला साँप'

MK Stalin Rahul
ANI

राहुल गांधी ने तमिलनाडु में कहा था कि यदि कोई भी दल संसद में परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक का समर्थन करता है, तो वह तमिलनाडु के साथ 'विश्वासघात' करेगा। उन्होंने ऐसे दलों की तुलना 21वीं सदी के 'एट्टप्पन' से की, जिन्हें इतिहास में गद्दारी के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और परिसीमन (डिलिमिटेशन) से जुड़े संभावित संविधान संशोधन विधेयक को लेकर राष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के तमिलनाडु दौरे के दौरान दिए गए बयान के बाद सहयोगी रहे कांग्रेस और द्रमुक (DMK) के बीच तीखी जुबानी जंग और तेज हो गई है। इस विवाद ने न केवल विपक्षी गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि भाजपा को भी राजनीतिक अवसर मिलने की चर्चा तेज कर दी है।

हम आपको बता दें कि राहुल गांधी ने तमिलनाडु में कहा था कि यदि कोई भी दल संसद में परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक का समर्थन करता है, तो वह तमिलनाडु के साथ "विश्वासघात" करेगा। उन्होंने ऐसे दलों की तुलना 21वीं सदी के "एट्टप्पन" से की, जिन्हें इतिहास में गद्दारी के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। राहुल के इस बयान को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि DMK इस मुद्दे पर अपना रुख नरम कर सकती है।

इसे भी पढ़ें: Kerala में भारी बारिश और तबाही के बीच प्रभावित परिवारों की मदद कर रही सरकार: Rahul Gandhi

उधर, राहुल गांधी की टिप्पणी पर DMK ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। पार्टी के वरिष्ठ सांसद दयानिधि मारन ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि "जिन लोगों ने कुछ मंत्री पदों के लिए हमारा भरोसा बेचा, उन्हें विश्वासघात की बात करने का कोई अधिकार नहीं है।" उन्होंने कांग्रेस को "जहरीला सांप" बताते हुए आरोप लगाया कि सत्ता पाने के लिए उसने भरोसे का सौदा किया। मारन का इशारा कांग्रेस द्वारा DMK से नाता तोड़कर तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के साथ गठबंधन करने की ओर था।

मारन ने कांग्रेस पर केवल राजनीतिक गठबंधन बदलने का ही आरोप नहीं लगाया, बल्कि तमिलनाडु से जुड़े कई संवेदनशील मुद्दों पर भी राहुल गांधी को घेरा। उन्होंने कहा कि जो नेता तमिलनाडु आकर कावेरी जल विवाद पर चुप रहते हैं, जो केवल परीक्षा में अनियमितताओं की बात करते हैं लेकिन NEET को पूरी तरह समाप्त करने की मांग नहीं करते और जो भाजपा पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाते हैं लेकिन TVK की कथित राजनीतिक गतिविधियों पर मौन रहते हैं, वे भी तमिलनाडु के साथ विश्वासघात कर रहे हैं।

इस बीच, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस और DMK के बीच बढ़ती तल्खी का फायदा भाजपा उठाने की कोशिश कर सकती है। भाजपा को उम्मीद है कि दोनों दलों के रिश्तों में आई खटास के कारण DMK संसद में परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों पर अपने रुख पर पुनर्विचार कर सकती है। हालांकि केंद्र सरकार ने अभी तक इस विधेयक को दोबारा लाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

इस बीच DMK ने भी पूरी तरह से दरवाजा बंद नहीं किया है। पार्टी का कहना है कि वह किसी भी विधेयक पर अंतिम फैसला उसके प्रावधानों का अध्ययन करने के बाद ही करेगी। साथ ही उसने स्पष्ट किया है कि यदि किसी प्रस्ताव से दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु के हित प्रभावित होते हैं, तो उसका समर्थन नहीं किया जाएगा।

हम आपको बता दें कि विपक्षी दलों का आरोप है कि परिसीमन के जरिए लोकसभा क्षेत्रों का पुनर्गठन इस तरह किया जा सकता है जिससे 2029 के आम चुनाव में भाजपा और उसके सहयोगी दलों को राजनीतिक लाभ मिले। इसी आशंका के कारण विपक्ष पहले भी इस प्रस्ताव का विरोध करता रहा है।

दूसरी ओर, तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (TNCC) के अध्यक्ष मणिकम टैगोर ने भी परिसीमन के मुद्दे पर भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा जनता के बढ़ते असंतोष से बचने के लिए परिसीमन विधेयक को संसद में पारित कराने की कोशिश कर रही है। टैगोर ने कहा कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन इस प्रस्ताव का पहले की तरह विरोध जारी रखेंगे।

चेन्नई में पत्रकारों से बातचीत के दौरान टैगोर ने बिना DMK का नाम लिए कहा कि तमिलनाडु की जनता अच्छी तरह जानती है कि पहले इस विधेयक की प्रतियां किसने जलाकर विरोध किया था और उन्हें उम्मीद है कि उस रुख में कोई बदलाव नहीं आएगा। उन्होंने कहा, "परिसीमन का समर्थन भाजपा, पीएमके और एआईएडीएमके ने किया था। अब देखना यह है कि उनके साथ कौन खड़ा होता है। जो लोग इस मुद्दे पर चुप हैं, उन्हें जनता को जवाब देना होगा।"

टैगोर ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और तमिलनाडु सरकार के बीच कावेरी तथा मेकेदातु परियोजना को लेकर सामने आए मतभेदों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि डीके शिवकुमार कर्नाटक के हितों की बात करेंगे, जबकि वह स्वयं तमिलनाडु के हितों का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि दोनों राज्यों के बीच इस मुद्दे पर मतभेद हैं और इसे आंतरिक राजनीति से नहीं जोड़ना चाहिए।

राहुल गांधी पर कावेरी मुद्दे पर चुप रहने के आरोपों को भी टैगोर ने खारिज किया। उनका कहना था कि कावेरी विवाद पर राजनीति करने से बचना चाहिए क्योंकि तमिलनाडु और कर्नाटक भारत के ही राज्य हैं, कोई अलग देश नहीं। उन्होंने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय द्वारा कर्नाटक के मुख्यमंत्री से संवाद की पहल को सकारात्मक कदम बताया।

बहरहाल, परिसीमन का मुद्दा अब केवल संसदीय प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने तमिलनाडु की राजनीति, कांग्रेस-DMK संबंधों और विपक्षी एकता को भी नई चुनौती के सामने खड़ा कर दिया है। आने वाले दिनों में यदि केंद्र सरकार इस विधेयक को संसद में लाती है, तो यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपक्षी दल अपनी पुरानी एकजुटता बनाए रखते हैं या राजनीतिक समीकरणों के चलते नए रुख अपनाते हैं।

All the updates here:

अन्य न्यूज़