कर्नाटक में विभाग आवंटन को लेकर कुछ मंत्रियों में असंतोष, येदियुरप्पा बोले- इस तरह की नाराजगी सामान्य बात है

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 22, 2021   11:01
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कर्नाटक में विभाग आवंटन को लेकर कुछ मंत्रियों में असंतोष, येदियुरप्पा बोले- इस तरह की नाराजगी सामान्य बात है

वरिष्ठ मंत्री जे सी मधुस्वामी अपने गृह जिले तुमकुरु में मुख्यमंत्री के एक कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए, जो तीन प्रमुख विभाग वापस लिए जाने से नाराज हैं, जबकि एम टी बी नागराज ने खुले तौर पर कहा कि वह आबकारी विभाग नहीं लेना चाहते हैं।

बेंगलुरु। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा ने बृहस्पतिवार को सात नए मंत्रियों को विभाग आवंटित किए और कुछ अन्य मंत्रियों के विभागों में फेरबदल किया, जिसको लेकर उनके मंत्रिमंडल में असंतोष की आवाज उठने लगी है क्योंकि कुछ मंत्री उन्हें आवंटित विभागों से नाखुश हैं। हालांकि, येदियुरप्पा ने इस मुद्दे को ज्यादा तूल न देते हुए कहा कि जब भी विभाग बदले जाते हैं, तब इस तरह की नाराजगी सामान्य बात है और उन्होंने नाराज लोगों को मना लिया है। वरिष्ठ मंत्री जे सी मधुस्वामी अपने गृह जिले तुमकुरु में मुख्यमंत्री के एक कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए, जो तीन प्रमुख विभाग वापस लिए जाने से नाराज हैं, जबकि एम टी बी नागराज ने खुले तौर पर कहा कि वह आबकारी विभाग नहीं लेना चाहते हैं। 

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उल्लेखनीय है कि अपने मंत्रिमंडल के विस्तार के एक हफ्ते बाद, येदियुरप्पा ने बृहस्पतिवार को सात नए मंत्रियों को विभाग आवंटित किए और कुछ मंत्रियों के विभागों में फेरबदल भी किया। मधुस्वामी से कानून, संसदीय मामलों, विधायी मामले और लघु सिंचाई विभाग ले लिए गए और उन्हें चिकित्सा शिक्षा, कन्नड़ और संस्कृति विभाग आवंटित किए गए हैं। कांग्रेस-जद(एस) छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले नागराज, के गोपालैया, के सी नारायण गौड़ा सहित कई मंत्रियों ने स्वास्थ्य मंत्री के सुधाकर के आवास पर बैठक की और कहा कि वे मुख्यमंत्री से उनको आवंटित विभागों पर चर्चा करेंगे। इस बीच, येदियुरप्पा ने कहा कि सभी मंत्री संतुष्ट हैं और कोई नाराजगी नहीं है। उन्होंने कहा, मैंने उन्हें (नाराज मंत्रियों) फोन किया और उनसे बात की है, हर कोई संतुष्ट है ... मैंने व्यक्तिगत रूप से सभी से बात की है। उन्होंने कहा, मंत्रिमंडल विस्तार या विभाग आवंटन एक आसान काम नहीं है क्योंकि हर कोई संतुष्ट नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने उनसे अपनी जिम्मेदारियों को साझा किया है, वे काम करें, कुछ दिनों के बाद भी अगर उन्हें समस्याएं आती हैं, तो फिर बदलने पर विचार करें। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को मनाने के लिए गृह मंत्री बसवराज बोम्मई और राजस्व मंत्री आर अशोक को नियुक्ति किया है। अशोक ने कहा कि उन्होंने गोपालैया और नागराज से बात की है और जल्द ही चीजों को सुलझा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वह और बोम्मई उन सभी से एक बार फिर बात करेंगे। उन्होंने कहा, हम सभी मुख्यमंत्री के साथ हैं और हर एक को उन पर भरोसा है। गौरतलब है कि एक लंबे इंतजार के बाद येदियुरप्पा ने 13 जनवरी को अपने 17 महीने पुराने मंत्रिमंडल का विस्तार किया और सात नए मंत्रियों को अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया। नए मंत्रियों में उमेश कट्टी को खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले तथा एस अंगारा को मत्स्य, बंदरगाह और अंतर्देशीय परिवहन विभाग दिए गए हैं। 

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राज्यपाल की सहमति से जारी आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, मुरुगेश निरानी खान और भूविज्ञान मंत्री होंगे तथा अरविंद लिंबावली को वन विभाग मिला है। अन्य मंत्रियों में, आर शंकर को नगर निकाय प्रशासन और रेशम उत्पादन विभाग मिला है जबकि एमटीबी नागराज आबकारी मंत्री और सी पी योगेश्वर लघु सिंचाई विभाग के मंत्री होंगे। येदियुरप्पा मंत्रिमंडल में मधुस्वामी एक प्रमुख मंत्री की हैसियत रखते हैं जो विधानसभा में सरकार का मजबूती से बचाव करते रहे हैं। गृह मंत्री बसवराज बोम्मई को कानून, संसदीय कार्य और विधायी विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। आनंद सिंह से वन विभाग वापस ले लिया गया है और उन्हें अब पर्यावरण तथा पारिस्थितिकी के अलावा पर्यटन विभाग दिया गया है, जबकि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री के. सुधाकर से चिकित्सा शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी वापस ले ली गई है। पहले खान और भूविज्ञान विभाग रखने वाले सी सी पाटिल को अब लघु उद्योग और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग का प्रभार दिया गया है।

मंत्री कोटा श्रीनिवास पुजारी को मत्स्य, बंदरगाह और अंतर्देशीय परिवहन विभाग की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया है और अब उनके पासपिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग होगा। पशुपालन मंत्री प्रभु चौहान से हज और वक्फ विभाग वापस ले लिया गया है जबकि श्रम मंत्री ए शिवराम हेब्बार से चीनी विभाग ले लिया गया है। के. गोपालैया से खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग ले लिए गए हैं, जिन्हें अब बागवानी और चीनी विभागों का प्रभार दिया गया है। के सी नारायण गौड़ा को युवा अधिकारिता, खेल, हज और वक्फ विभाग दिए गए हैं, जबकि नगर निकाय प्रशासन, बागवानी और रेशम उत्पादन विभागों को उनसे वापस ले लिया गया है। मुख्यमंत्री ने कार्मिक और प्रशासनिक सुधार विभाग (डीपीएआर), कैबिनेट मामलों, वित्त, बेंगलुरु विकास, ऊर्जा, खुफिया, योजना, कार्यक्रम निगरानी, सांख्यिकी, अवसंरचना विकास और बाकी बचे अन्य सभी विभागों को अपने पास रखा है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ मंत्रियों में उनको आवंटित किए गए विभागों को लेकर नाराजगी है और इस संबंध में उनके मुख्यमंत्री से मुलाकात करने की संभावना है। राज्य मंत्रिमंडल में अब 33 मंत्री हो गए हैं, जिसकी कुल क्षमता 34 है।





Disclaimer:प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।


त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दिया मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा, दिल्ली किया गया था तलब

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मार्च 9, 2021   16:21
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त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दिया मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा, दिल्ली किया गया था तलब

उत्तराखंड

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पद से इस्तीफा दे दिया है। रावत ने अपना इस्तीफा राज्यपाल बेबी रानी मौर्या सौंपा है। 





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नंदीग्राम आंदोलन का जिक्र करते हुए भावुक हुईं ममता बनर्जी, बोलीं- उस वक्त मेरे साथ बहुत अत्याचार हुए थे

  •  अनुराग गुप्ता
  •  मार्च 9, 2021   16:17
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नंदीग्राम आंदोलन का जिक्र करते हुए भावुक हुईं ममता बनर्जी, बोलीं- उस वक्त मेरे साथ बहुत अत्याचार हुए थे

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि उस वक्त मेरी तबीयत ठीक नहीं थी। सिंगूर के अनशन के बाद मैं अस्पताल में थी फिर भी यहां पर आई। मुझे रोकने के लिए पेट्रोल बम भी फोड़े गए थे। उस वक्त मुझे कितनी तकलीफ हुई थी, इसकी आपको जानकारी है।

नंदीग्राम। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में एक जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि नंदीग्राम से सीट खाली हुई थी इसलिए मैं यहां आई हूं। मैं हर नाम भूल सकती हूं लेकिन नंदीग्राम का नाम नहीं भूल सकती। उन्होंने कहा कि नंदीग्राम में जब आंदोलन चल रहा था उस वक्त मेरे घर में काली पूजा हो रही थी। मैं उस समय अपने घर वापस नहीं आ पाई थी। क्योंकि उस वक्त मेरे साथियों ने फोन करके बताया था कि किस तरह से नंदीग्राम में गोली चल रही थी। तब मेरे जहन में यही चल रहा था कि मैं किस तरह से लोगों को बचाऊं। आप लोगों को याद होगा कि किस तरह से 14 मार्च को यहां पर गोलियां चली थी। 

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तृणमूल प्रमुख ने कहा कि उस वक्त मेरी तबीयत ठीक नहीं थी। सिंगूर के अनशन के बाद मैं अस्पताल में थी फिर भी यहां पर आई। मुझे रोकने के लिए पेट्रोल बम भी फोड़े गए थे। उस वक्त मुझे कितनी तकलीफ हुई थी, इसकी आपको जानकारी है। उस दिन रास्ते में कोई नहीं था। उस दिन रास्ते में मैं अकेले थी और मैंने ठान लिया था कि मुझे नंदीग्राम पहुंचना है।

ममता ने कहा कि बंगाल के राज्यपाल गोपाल कृष्ण गांधी ने रात के दो बजे मुझे फोन करके कहा था कि आप रात में नंदीग्राम जाने की कोशिश नहीं करिए। क्योंकि आपकी जान को खतरा हो सकता है। उस वक्त हमने फैसला लिया था कि हम सोलाघाट से जाएंगे लेकिन हर एक रास्त बंद था। आप लोगों को यह याद है कि मैं किस तरह से नंदीग्राम पहुंची थी। 

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उन्होंने कहा कि आप लोगों को याद होगा कि मैं पैदल चलकर, दोपहिए का इस्तेमाल करके तामलुक अस्पताल पहुंची थी। लेकिन सीपीएम को यह समझ में नहीं आया था कि मैं कैसे तामलुक पहुंची हूं। फिर मैं तामलुक से चंद्रपुर गई। वहां पर मुझे गाली दी गई थी। इतना ही नहीं चंद्रपुर में मीडिया को भी रोक दिया गया था। हम पर आंसू गैस के गोले दागे गए थे और आपको याद होगा कि किस तरह से अत्याचार हुआ था। इसके बाद मैंने नंदीग्राम के आंदोलन को पूरे बंगाल में फैला दिया था।

उन्होंने कहा कि आप लोगों ने जिस तरह से अत्याचारों के खिलाफ खड़े हुए हैं। इसलिए मैं कह सकती हूं कि अपना नाम भूल सकती हूं लेकिन नंदीग्राम को नहीं। तृणमूल प्रमुख ने भावुक अपील करते हुए कहा कि अगर आप लोग कहेंगे तो मैं नामांकन दाखिल नहीं करूंगी लेकिन आपको लगता है कि मैं आपकी ही बेटी हूं, आपके आंदोलन के साथ हूं तब जाकर मैं नामांकन दाखिल करूंगी। मैं आप लोगों से जानना चाहती हूं। कुछ लोग कहते हैं कि मैं बाहर से हूं। मैं बंगाल की बेटी हूं लेकिन जो लोग यह कह रहे हैं वो राजस्थान से, दिल्ली से आ रहे हैं क्या वह बाहरी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सीपीएम, कांग्रेस और भाजपा एक है। यह आपको नहीं भूलना है।





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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत-बांग्लादेश मैत्री सेतु का उद्घाटन किया

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मार्च 9, 2021   16:03
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत-बांग्लादेश मैत्री सेतु का उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और बांग्लादेश को जोड़ने वाले ‘मैत्री सेतु’ का उद्घाटन किया।मोदी ने कहा कि 2107 में त्रिपुरा की जनता ने भाजपा पर भरोसा जताकर ‘‘डबल इंजन’’ की सरकार बनाई आज वह पुरानी सरकार के 30 साल और डबल इंजन की तीन साल की सरकार में आए बदलाव को स्पष्ट अनुभव कर रही है।

नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को भारत और बांग्लादेश के बीच फेनी नदी पर बने ‘मैत्री सेतु’ का उद्घाटन किया। साथ ही प्रधानमंत्री ने पूर्वोत्तर के राज्य त्रिपुरा में कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का भी उद्घाटन और शिलान्यास किया। वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से ‘मैत्री सेतु’ का उद्घाटन करने के बाद प्रधानमंत्री ने कहा कि मैत्री सेतु के खुल जाने से अगरतला, अंतरराष्ट्रीय समुद्री बंदरगाह से भारत का सबसे नज़दीकी शहर बन जाएगा। उन्होंने कहा कि आज राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण से जुड़़ी जिन परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया है, उनसे पूर्वोत्तर का बंदरगाह से संपर्क और सशक्त होगा। मोदी ने कहा कि 2107 में त्रिपुरा की जनता ने भाजपा पर भरोसा जताकर ‘‘डबल इंजन’’ की सरकार बनाई आज वह पुरानी सरकार के 30 साल और डबल इंजन की तीन साल की सरकार में आए बदलाव को स्पष्ट अनुभव कर रही है।

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उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती वामपंथी शासन में त्रिपुरा में जहां कमीशन और भ्रष्टाचार के बिना काम होने मुश्किल थे, वहां आज सरकारी लाभ लोगों के बैंक खाते में सीधे पहुंच रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘जो कर्मचारी समय पर सैलरी पाने के लिए भी परेशान हुआ करते थे, उनको सातवें वेतन आयोग के तहत सैलरी मिल रही है। जहां किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए अनेक मुश्किलें उठानी पड़तीं थीं, वहीं पहली बार त्रिपुरा में किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद सुनिश्चित हुई।’’ उन्होंने कहा कि जिस त्रिपुरा को हड़ताल की संस्कृति ने बरसों पीछे कर दिया था, आज वो व्यवसाय की सुगमता के लिए काम कर रहा है और जहां कभी उद्योगों में ताले लगने की नौबत आ गई थी, वहां अब नए उद्योगों और नए निवेश के लिए जगह बन रही है। इस अवसर पर बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना का एक वीडियो संदेश भी प्रसारित किया गया। कार्यक्रम में त्रिपुरा के राज्यपाल रमेश बैस और मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब भी उपस्थित थे।

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फेनी नदी त्रिपुरा और बांग्लादेश में भारतीय सीमा के बीच बहती है। इस सेतु का निर्माण राष्ट्रीय राजमार्ग और बुनियादी ढांचा विकास निगम लिमिटेड ने किया है। इस पर 133 करोड़ रुपये की लागत आई है। 1.9 किलोमीटर लंबा यह पुल भारत में सबरूम को बांग्लादेश के रामगढ़ से जोड़ता है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार और परस्पर संपर्क बढ़ेगा। मैत्री सेतु के उद्घाटन से बंग्लादेश के चट्टगांव बंदरगाह तक पहुंचने के लिए त्रिपुरा, पूर्वोत्तर का प्रवेश द्वार बन गया है। यह सबरूम से केवल 80 किलोमीटर की दूरी पर है। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर सबरूम में एकीकृत जांच चौकी स्थापित करने के लिए आधारशिला भी रखी। प्रधानमंत्री ने कैलाशहर में उनाकोटी जिला मुख्यालय को खोवाई जिला मुख्यालय से जोड़ने वाले एचएच-208 की आधारशिला रखी और राज्य सरकार द्वारा विकसित राज्य राजमार्गों और अन्य जिला सड़कों का भी उद्घाटन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत 40978 घरों और अगरतला स्मार्ट सिटी मिशन के तहत निर्मित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का भी उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री ने पुराने मोटर स्टैंड में मल्टी लेवल कार पार्किंग और वाणिज्यिक परिसर के विकास के लिए आधारशिला भी रखी।





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