UNLF P शांति समझौता मणिपुर में स्थिरता की राह में बड़ा कदम: सरकार

मणिपुर सरकार ने प्रतिबंधित संगठन यूएनएलएफ (पी) के साथ 2023 में हुए समझौते को राज्य में शांति बहाली का अहम पड़ाव बताया है। सरकारी प्रवक्ता टी. राधेश्याम सिंह ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का ब्योरा देते हुए 16,000 करोड़ रुपये के राष्ट्रीय राजमार्गों की मंजूरी का उल्लेख किया। वहीं सीमा पर 3,223 करोड़ रुपये की लागत से 240 किलोमीटर बाड़ लगाने का काम भी स्वीकृत किया गया है।
इंफाल, छह अक्टूबर मणिपुर सरकार का मानना है कि प्रतिबंधित संगठन यूएनएलएफ (पी) के साथ 2023 में हुआ शांति समझौता राज्य में शांति और स्थिरता स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास था। राज्य सरकार के प्रवक्ता टी. राधेश्याम सिंह ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए यह बात कही। नवंबर 2023 में जातीय संघर्ष के चरम के दौरान यूएनएलएफ (पाम्बेई), केंद्र और मणिपुर सरकार के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।
उस समय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे संगठन के छह दशक लंबे उग्रवाद के अंत के तौर पर बताया था। मणिपुर की 60 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव अगले साल प्रस्तावित हैं। सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य में संपर्क और बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई बड़ी परियोजनाएं शुरू की गई हैं।
उन्होंने निर्माणाधीन जिरीबाम-इंफाल रेलवे लाइन परियोजना का भी उल्लेख किया, जिसमें नोनी पुल का निर्माण शामिल है। उन्होंने इसे दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पियर पुल बताया। भाजपा विधायक ने कहा कि राज्य के लिए करीब 16,000 करोड़ रुपये के निवेश से लगभग 1,100 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्गों को मंजूरी दी गई है।
उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से राज्य में संपर्क व्यवस्था और बेहतर होगी तथा आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। सरकार के एक अन्य प्रवक्ता एस. रंजन सिंह ने कहा कि मणिपुर में दिसंबर 2019 में इनर लाइन परमिट (आईएलपी) व्यवस्था लागू की गई थी, जबकि अनुमानित 3,223 करोड़ रुपये की लागत से भारत-म्यांमा सीमा के करीब 240 किलोमीटर हिस्से में बाड़ लगाने की मंजूरी दी गई है।
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