रोजगार पर राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग को लेकर दिल्ली में तिरंगा यात्रा निकाली गयी

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Twitter @ Gopal rai
पुलिस द्वारा तिरंगा मार्च रोके जाने के बाद दिल्ली सरकार में मंत्री गोपाल राय ने कहा कि राष्ट्रीय रोजगार नीति लागू करने की मांग को लेकर यह आंदोलन नंद नगरी में 22 अगस्त तक जारी रहेगा। हम देश के सभी नागरिकों से इस आंदोलन में शामिल होने की अपील करते हैं।
नयी दिल्ली। रोजगार पर राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग को लेकर विभिन्न नागरिक समाज संगठनों ने संयुक्त रोजगार आंदोलन समिति के बैनर तले मंगलवार को उत्तरी-पूर्वी दिल्ली के नंद नगरी से तिरंगा मार्च निकाला। नंद नगरी के गगन सिनेमा से निकाले गए मार्च का नेतृत्व दिल्ली के कैबिनेट मंत्री और ‘देश की बात’ फाउंडेशन के संस्थापक गोपाल राय ने किया। लेकिन पुलिस ने मार्च के जंतर-मंतर पहुंचने से पहले ही इसे गोकुलपुरी में रोक दिया। पुलिस द्वारा तिरंगा मार्च रोके जाने के बाद दिल्ली सरकार में मंत्री गोपाल राय ने कहा, ‘‘राष्ट्रीय रोजगार नीति लागू करने की मांग को लेकर यह आंदोलन नंद नगरी में 22 अगस्त तक जारी रहेगा। हम देश के सभी नागरिकों से इस आंदोलन में शामिल होने की अपील करते हैं।’’ 

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रोजगार आंदोलन का आयोजन 16 से 22 अगस्त तक जंतर-मंतर पर होना था। राय ने कहा कि मार्च जंतर-मंतर पर समाप्त होने वाला था, लेकिन पुलिस ने उसे रोक दिया। संयुक्त रोजगार आंदोलन समिति द्वारा मंगलवार को जारी बयान के अनुसार, ‘‘पूरे देश में तिरंगा यात्रा निकाली जा रही है, लेकिन अगर हम अपनी तिरंगा पदयात्रा में रोजगार का मुद्दा उठा रहे हैं तो हमें रोका जा रहा है। हमें यह स्वीकार नहीं है और यह आंदोलन जारी रहेगा।’’ बयान के अनुसार, देश के 200 समूहों के 2,000 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने तिरंगा मार्च में हिस्सा लिया और रोके जाने पर अनशन पर बैठ गए। 

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राय ने कहा कि बिना नौकरियों के विकास असंभव है और राष्ट्रीय रोजगार नीति वक्त की जरूरत है और बेरोजगारी की समस्या को इसे लागू करके ही दूर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि केन्द्र को तत्काल राष्ट्रीय रोजगार नीति बनाने पर विचार करना चाहिए। आम आदमी पार्टी (आप) के नेता राय ने कहा, ‘‘देश में बढ़ रही बेरोजगारी की दर के मद्देनजर, देश के सभी क्षेत्रों के बुद्धिजीवियों के साथ मिलकर हमने राष्ट्रीय रोजगार नीति का मसौदा तैयार किया है। हम इसे केन्द्र सरकार के साथ साझा करना चाहते हैं, ताकि इस मसौदे को कानूनी रूप से संसद की मंजूरी मिल सके।

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