बेबाक नेता थे जॉर्ज फर्नांडीज, सत्ता में रहे या विपक्ष में गरीबों की आवाज सदैव बुलंद की

By सुरेश हिन्दुस्थानी | Publish Date: Jan 29 2019 4:43PM
बेबाक नेता थे जॉर्ज फर्नांडीज, सत्ता में रहे या विपक्ष में गरीबों की आवाज सदैव बुलंद की
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वे जब रक्षा मंत्री के पद पर थे तभी पाकिस्तान ने भारत पर हमला कर दिया, जिसके बाद कारगिल युद्ध हुआ था। भारतीय सेना ने तब ऑपरेशन विजय के दौरान पाकिस्तानी सेना के दांत खट्टे कर दिये थे।

भारतीय राजनीति में ऐतिहासिक राजनेताओं की श्रेणी में शामिल प्रसिद्ध समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडीज अब हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन देश के लिए उनके किए गए कार्य जॉर्ज फर्नांडीज को चिरकाल तक जीवित रखेंगे। 88 वर्षीय जॉर्ज फर्नांडीज अल्जाइमर की बीमारी से पीड़ित थे। पूर्व केन्द्रीय मंत्री जॉर्ज फर्नांडीज भारतीय राजनीति की प्रमुख हस्तियों में से एक रहे हैं। अपनी आवाज से देश और राज्यों की सरकार को हिला देने वाले जॉर्ज फर्नांडीज के कई आंदोलन पूरे देश की आवाज बनते हुए दिखाई दिए। इसका कारण एक मात्र यही था कि उन्होंने सत्ता के लिए राजनीति नहीं की, वह मात्र जन हित की राजनीति ही करते रहे। इस कारण उन्हें जनता की आवाज कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं कही जाएगी। एक बार जॉर्ज फर्नांडीज ने 1974 में ऑल इंडिया रेलवेमैन फेडरेशन का प्रमुख रहते हुए ऐतिहासिक रेलवे हड़ताल की थी, जिसने सरकार को हिलाकर रख दिया था। इस हड़ताल की गूंज पूरे देश में सुनाई दी। इसके साथ ही जॉर्ज फर्नांडीज ने इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल के संत्राश को भी भोगा। जॉर्ज फर्नांडीज ने आपातकाल के विरुद्ध देश भर में ऐसी आवाज उठाई कि सरकार भी सोचने पर विवश होती दिखाई दी। इसके बाद जॉर्ज फर्नांडीज ऐसे भूमिगत हुए कि जांच एजेंसियां भी उनका सुराग नहीं लगा सकीं।
 
 


जॉर्ज फर्नांडीज बिहार के मुजफ्फरपुर सीट से चार बार सांसद रहे। 1980 में हुए लोकसभा चुनाव में वह मुजफ्फरपुर से जीते थे। उन्होंने विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार में रेलवे मंत्री के पद पर अपनी सेवा दी। उनका रेल मंत्री का कार्यकाल आज भी एक आदर्श उदाहरण के रूप में याद किया जाता है। 1998 के चुनाव में वाजपेयी सरकार पूरी तरह सत्ता में आयी थी उस वक्त राजग का गठन हुआ था। इस वक्त जॉर्ज फर्नांडीस राजग के संयोजक भी रहे। उन्होंने अपने राजनीतिक कौशल का उपयोग करते हुए अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार को सफलतापूर्वक चलाने में अभूतपूर्व योगदान दिया। वे राजग की सरकार में दोनों बार रक्षा मंत्री बने। वे जब रक्षा मंत्री के पद पर थे तभी पाकिस्तान ने भारत पर हमला कर दिया, जिसके बाद कारगिल युद्ध हुआ था। भारतीय सेना ने तब ऑपरेशन विजय के दौरान पाकिस्तानी सेना के दांत खट्टे कर दिये थे। इतना ही नहीं पाकिस्तान की सेना ने भारतीय सेना की शक्ति के समक्ष अपने घुटने टेक दिए।
 
जॉर्ज फर्नांडीज वास्तव में भारतीय राजनीति के एक ऐसे नेता थे, जिन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में शुचिता का उदाहरण प्रस्तुत किया। हमें स्मरण होगा कि जॉर्ज फर्नांडीज के रक्षा मंत्री रहते हुए रक्षा सौदे का एक झूठ पर आधारित घोटाला सामने आया, जिसके चलते उन्होंने भारतीय राजनीति में आदर्श प्रस्तुत करते हुए अपने पद से त्याग पत्र दे दिया, लेकिन जब वे पूरी तरह से निर्दोष साबित हो गए, तब प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें ससम्मान केन्द्रीय मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया। पूर्णत: ईमानदारी की राह पर चलने वाले जॉर्ज फर्नांडीज को वर्तमान राजनीति ने न तो अपनी जिम्मेदारियों से भटकने के लिए मजबूर किया और न ही वे सिद्धांतों से समझौता ही करते दिखाई दिए। जॉर्ज फर्नांडीज के बारे में कहा जाता है कि वे फक्कड़ स्वभाव के राजनेता थे, जिन्होंने कभी अपने कपड़ों पर प्रेस नहीं की और न ही अपने बालों में कंघी का उपयोग किया। वे कभी चमक दमक भरी राजनीति नहीं करते थे, उनका व्यक्तित्व ही उनकी चमक का पर्याय था।
 
जॉर्ज फर्नांडीज का जन्म 3 जून 1930 को कर्नाटक के मैंगलोर में एक ईसाई परिवार में हुआ था। वे पहले जनता पार्टी और बाद में बने जनता दल के प्रमुख रहे। जनता दल से अलग होकर उन्होंने समता पार्टी की स्थापना की, जो आज की जनता दल यूनाइटेड है, जिसके नेता नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने मोरारजी देसाई की जनता पार्टी और अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार में संचार, उद्योग, रेलवे और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी बखूबी संभाली। जॉर्ज के माता-पिता ने उन्हें ईसाई धर्म की शिक्षा के लिए बैंगलोर भेजा था, उन्होंने पादरी बनने का प्रशिक्षण भी लिया, लेकिन वे पादरी न बनकर एक मजदूर नेता के रूप में प्रसिद्ध होते चले गए। बाद में भारतीय राजनीति में धूमकेतु की तरह उभर कर सामने आए।


 
भारतीय राजनीति में जिस प्रकार से उनके रक्षा मंत्री के कार्यकाल को कारगिल युद्ध में भारत की शानदार विजय के रूप में स्मरण किया जाता है, ठीक वैसे ही उनके उद्योग मंत्री रहते हुए भी देश भाव की राजनीति का प्रकटीकरण भी होता दिखाई दिया। आज के समय में यह बहुत ही कम लोगों को पता होगा कि 1977 में जब वे देश के उद्योग मंत्री रहे, तब गलत तरीके से व्यापार करने वाली विदेशी कंपनियों पर शिकंजा कसा और आईबीएम, कोका कोला कंपनी को देश छोड़ने का निर्देश प्रसारित किया। जॉर्ज फर्नांडीज का यह कदम निःसंदेह विदेशी कंपनियों की बढ़ती मनमानी को रोकने के लिए और राष्ट्रीय हितों को बढ़ावा देने वाला ही था। जॉर्ज फर्नांडीज के इस कदम की देश के छोटे व्यापारियों ने भरपूर प्रशंसा की।
 


 
जॉर्ज फर्नांडीज भले ही अपनी बीमारी के चलते वर्तमान में सक्रिय राजनीति से दूर रहे, लेकिन उनके द्वारा किए गए कार्यों की अमिट छाप देश की राजनीति के लिए स्थायी भाव पैदा करने वाली है। उन्होंने हमेशा मन, वचन और कर्म से भारत के लिए ही जीवन जिया। कहा जाता है कि व्यक्ति शरीर रूप से भले ही इस संसार से विदा हो जाए, लेकिन उसके कार्य व्यक्ति को हमेशा जिन्दा रखते हैं। उनके कर्म का एक मात्र सिद्धांत यही था कि उनके सारे कार्य उनके अपने लिए नहीं थे, वे सदैव दूसरों की ही चिंता किया करते थे। ऐसे राजनेता आज के समय में बहुत ही कम हैं। कई व्यक्ति तो देवलोक गमन करने के बाद चर्चा के केन्द्र बनते हैं लेकिन जॉर्ज फर्नांडीज एक ऐसे राजनेता थे, जो अपने जीवनकाल में भारतीय राजनीति के आदर्श बन गए थे। आज के राजनेताओं के लिए जॉर्ज फर्नांडीज का जीवन एक आदर्श है। जिस पर हर किसी को चलना ही चाहिए।
 
-सुरेश हिन्दुस्थानी

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