गृहिणी राष्ट्रनिर्माता है तो हिंसा की शिकार क्यों?
आज आवश्यकता इस बात की है कि महिला सशक्तीकरण को बहुआयामी दृष्टि से देखा जाए। महिलाओं के घरेलू श्रम को मान्यता देने के साथ-साथ उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। विद्यालयों और परिवारों में लैंगिक समानता के संस्कार विकसित किए जाएं। पुरुषों और लड़कों को भी इस परिवर्तन प्रक्रिया का भाग बनाया जाए।



























































