समंदर बन गई हैं महानगरों की सड़कें, डूबती गाड़ियों को कोई किनारा नहीं मिलता
क्या हम 2047 के विकसित भारत की इमारत उस बुनियाद पर खड़ी कर रहे हैं जो हर मानसून में हिल जाती है? क्या अब समय नहीं आ गया है कि विकास के दावों से पहले शहरों की जल निकासी व्यवस्था, निर्माण की गुणवत्ता, नगर नियोजन और प्रशासनिक जवाबदेही को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया जाए?



























































