'जी तो रहे हैं, लेकिन जिंदगी चली गई', पहलगाम हमले के एक साल बाद शहीद लेफ्टिनेंट विनय नरवाल के पिता का दर्द
समय घावों को भर देता है, अक्सर कहा जाता है। लेकिन करनाल के नरवाल परिवार के लिए समय 22 अप्रैल, 2025 की उस मनहूस दोपहर को ठहर गया था। आज पहलगाम आतंकी हमले को एक साल बीत चुका है, लेकिन शहीद लेफ्टिनेंट विनय नरवाल के घर की खामोशी वह सब कुछ बयां कर देती है जिसे शब्द नहीं कह सकते।



























































