बागी बलिया के नीरज सपा छोड़ बनेंगे समाजवादी भगवाधारी

By अभिनय आकाश | Publish Date: Jul 16 2019 12:28PM
बागी बलिया के नीरज सपा छोड़ बनेंगे समाजवादी भगवाधारी
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देश के आठवें और इकलौते समाजवादी प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के निधन के बाद यह चर्चा चल उठी थी कि उनके परिवार में विरासत कौन संभालेगा। इसको लेकर जंग भी चली। नीरज शेखर को विरासत मिली और उन्होंने बलिया से उपचुनाव लड़ा औऱ जीत दर्ज की।

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। राज्यसभा सांसद नीरज शेखर ने पार्टी और राज्यसभा सदस्यता दोनों से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे को राज्यसभा सभापति एम वेंकैया नायडू ने स्वीकार भी कर लिया है। नीरज शेखर भाजपा में शामिल हो रहे हैं। नीरज शेखर पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के पुत्र हैं। नीरज का राज्यसभा में कार्यकाल 25 नवंबर 2020 तक का बचा था। लेकिन डेढ़ साल पहले ही उन्होंने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया। नीरज शेखर लोकसभा चुनाव 2019 में बलिया से टिकट मांग रहे थे। लेकिन उनकी जगह सनातन पांडेय पर समाजवादी पार्टी ने भरोसा जताया। जिसके बाद से ही वो पार्टी से अलग-थलग हो गए थे। 



नीरज के इस कदम से ऐसा माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी अगड़ी जातियों से दूर हो रही है। उसका भाजपा भरपूर लाभ ले रही है। सपा के पास नीरज शेखर के रुप में एक विरासत थी जिसे उन्होंने खो दिया है। नीरज शेखर अगर भाजपा में जाते हैं तो यह बहुत बड़ा झटका होगा। पूर्वांचल में क्षत्रिय समाज खासतौर के वोटों का नुकसान होगा। समाजवादी पार्टी की राजनीतिक और रणनीतिक चूक कही जाएगी कि वो नीरज शेखर को अपनी पार्टी में रोक नहीं सके।

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देश के आठवें और इकलौते समाजवादी प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के निधन के बाद यह चर्चा चल उठी थी कि उनके परिवार में विरासत कौन संभालेगा। इसको लेकर जंग भी चली। नीरज शेखर को विरासत मिली और उन्होंने बलिया से उपचुनाव लड़ा औऱ जीत दर्ज की। अपने पहले लोकसभा उपचुनाव में नीरज शेखर ने वीरेंद्र सिंह मस्त को ही पटखनी दी थी। जिनसे भिड़ने के लिए 2019 में सपा ने सनातन पांडेय को नीरज पर वरीयता दी। नीरज 2009 में भी सांसद चुने गए। लेकिन 2014 के मोदी लहर में नीरज की गाड़ी आगे बढ़ नहीं सकी और उन्हें चुनाव में पराजय का सामना करना पड़ा। जिसके बाद सपा ने उन्हें नवंबर 2014 में राज्यसभा में भेजा और वह लगभग पांच साल तक सांसद रहे। नवंबर 2020 में उनका कार्यकाल खत्म हो रहा था और उससे पहले ही उन्होंने राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। 
ऐसी भी खबरें आ रही थीं कि नीरज शेखर की राम गोविंद चौधरी, अंबिका चौधरी और नारद राय आदि से नहीं बन रही। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की भी मुलायम सिंह यादव से नहीं बनी थी। मुलायम सिंह यादव समाजवादी पार्टी में किनारे कर दिए गए और अखिलेश के हाथों में सपा की कमान थी तो माना जा रहा था कि यंग अखिलेश से उनकी अच्छी बनेगी। लेकिन खबरों के अनुसार अखिलेश से भी उनकी अच्छी नहीं बनी। 
नीरज के समाजवादी पार्टी छोड़ने के पीछे यह भी कारण बताए जा रहे हैं कि लोकसभा चुनाव में क्षत्रीय क्षत्रपों का हाल बेहाल हो गया। सपा, बसपा और कांग्रेस का उत्तर प्रदेश में भविष्य अंधकारमय लग रहा है। इसी क्रम में नीरज शेखर को भी यह लगा कि सपा में राजनीति का बहुत ज्यादा कोई स्कोप नहीं शेष रह गया है, जिसके बाद उन्होंने यह कदम उठाया। साल 2017 के विधानसभा चुनाव पर भी गौर करें तो बलिया लोकसभा के अंतर्गत आने वाली पांच विधानसभा सीटों में से 4 पर भाजपा और 1 पर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने कब्जा किया था और सपा, बसपा, कांग्रेस को क्षेत्र की कोई विधानसभा सीट हासिल नहीं हो पाई थी। नीरज शेखर के इस्तीफे के बाद भाजपा में शामिल होने के कदम को उत्तर प्रदेश में भाजपा के एकाधिकार और राज्यसभा में संख्याबल बढ़ाने के कदम के रूप में भी देखा जा रहा है। 
वैसे पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के भी भाजपा से संबंध हमेशा से अच्छे रहे और राजनीतिक जानकारों के अनुसार भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी उम्मीदवार चयन के लिए पार्टी की बैठक में चंद्रशेखर की सीट बलिया का नाम आते ही 'आगे बढ़ो-आगे बढ़ो' कहने लगते थे। लोग समझ जाते कि बलिया सीट पर चंद्रशेखर के खिलाफ बहुत ज्यादा दिमाग लगाने की जरूरत नहीं। भाजपा नेताओं के साथ चंद्रशेखर के रिश्ते हमेशा बेहतर रहे, लेकिन उन्होंने कभी भी भाजपा की विचारधारा का समर्थन नहीं किया। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को ताउम्र 'गुरुजी' शब्द से ही संबोधित किया, लेकिन सदन में हमेशा मुखर विरोध भी किया। हालांकि भाजपा ने उनके खिलाफ हमेश अपना उम्मीदवार उतारा था, लेकिन जिस समाजवादी पार्टी ने कभी भी चंद्रशेखर के खिलाफ प्रत्याशी नहीं उतारा उसका त्याग कर भाजपा में शामिल होने का कदम भाजपा में समाजवादी नेताओं की एंट्री के रूप में देखा जा सकता है। 
चंद्रशेखर की राजनीति पर गौर करें तो वह क्षत्रिय समाज का प्रतिनिधित्व करते थे। पूरा राजपूत समाज उनके साथ खड़ा रहता था और नतीजतन 8 लोकसभा चुनाव में वो बलिया से चुनकर संसद पहुंचते रहे। वहीं अब वक्त बदला तो प्रदेश में भाजपा का प्रभाव भी काफी बढ़ा और राजपूत समाज अब राजनाथ सिंह के साथ मजबूती से खड़ा नजर आता है। वह देश के रक्षा मंत्री हैं और भाजपा के कद्दावर नेता भी हैं। ऐसे में नीरज शेखर को भाजपा ही सबसे मुफीद पार्टी लगी।
 

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