वन कर्मचारियों पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाकर जेसीबी छुड़ा ले गया माफिया

वन कर्मचारियों पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाकर जेसीबी छुड़ा ले गया माफिया

बताया गया है कि वन विभाग के दल ने मगर कुण्डा पहुंचकर ऑपरेटर सहित जेसीबी को अपने कब्जे में ले लिया, लेकिन इसी दौरान झाडिय़ों में छिपे बैठे करीब 15-16 लोगों ने बंदूकों और कट्टों से वन कर्मचारियों पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। खनन माफिया ने लगभग 15 से 20 राउण्ड गोलियां चलाईं।

ग्वालियर। मध्य प्रदेश में ग्वालियर के आरक्षित और संरक्षित वन क्षेत्रों में सक्रिय खनन माफिया अब मरने-मारने पर उतारू हो गए हैं। वे हर कीतम पर जंगलों से कीमती फर्शी पत्थर निकालकर ले जाना चाहते हैं। मैदानी वन कर्मचारी उन्हें जब भी रोकने का प्रयास करते हैं तो खनन माफिया न केवल पथराव करते हैं बल्कि गोलियां भी चलाते हैं। इसी क्रम में गुरुवार-शुक्रवार की रात में सोनचिरैया अभयारण्य की तिघरा गेमरेंज के अंतर्गत कालाखेत के जंगल में अवैध खनन रोकने पहुंचे वन कर्मचारियों पर खनन माफिया ने ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं और मौसे से ऑपरेटर सहित जेसीबी को छुड़ाकर ले गए। कालाखेत के जंगल में फरवरी माह में ही यह तीसरा मौका है, जब खनन माफिया ने वन कर्मचारियों पर जानलेवा हमला किया है। इससे पहले खनन माफिया वन कर्मचारियों पर दो बार हमला कर चुके हैं। 

 

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जानकारी के अनुसार बीते गुरुवार को देर रात वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना मिली कि तिघरा गेमरेंज के अंतर्गत कालाखेत के जंगल में कुछ लोग अवैध खनन के उद्देश्य से जेसीबी से नया गड्ढा खोद रहे हैं। इस पर वन परिक्षेत्र अधिकारी विकास मिश्रा के नेतृत्व में 10 से 12 वन कर्मचारियों का एक दल मौके पर भेजा गया। रात करीब 12.30 बजे वन कर्मचारियों का दल कालाखेत के जंगल में स्थित कक्ष क्रमांक 360 में पहुंचा तो वहां जेसीबी की आवाज सुनाई दी। वन कर्मचारी आवाज की दिशा में चलते हुए जब तक मौके पर पहुंचे तो खनन माफिया ने जीसीबी को वहां से कुछ ही दूरी पर स्थित मगर कुण्डा नामक स्थान पर छिपा दिया। इसके बाद जेसीबी को तलाशने के लिए वन कर्मचारी जंगल में सर्चिंग करने लगे। साथ ही मुंडे बाबा वन चौकी से अन्य कर्मचारियों को भी मौके पर बुला लिया, जिनमें एसएएफ के चार सशस्त्र जवान भी शामिल थे।

 

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बताया गया है कि वन विभाग के दल ने मगर कुण्डा पहुंचकर ऑपरेटर सहित जेसीबी को अपने कब्जे में ले लिया, लेकिन इसी दौरान झाडिय़ों में छिपे बैठे करीब 15-16 लोगों ने बंदूकों और कट्टों से वन कर्मचारियों पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। खनन माफिया ने लगभग 15 से 20 राउण्ड गोलियां चलाईं। चूंकि फायरिंग के दौरान कुछ वन कर्मचारी जेसीबी मशीन के पास मौजूद थे, इसलिए वन कर्मचारियों ने जावाबी फायरिंग नहीं की क्योंकि जवाबी फायरिंग करने से साथी कर्मचारियों को नुकसान पहुंचने की संभावरा थी। इस विपरीत परिस्थिति में वन कर्मचारियों ने पेड़ों की ओट में छिपकर अपनी जान बचाई। इसी मौके का फायदा उठाकर खनन माफिया ऑपरेटर और जेसीबी मशीन को छुड़ाकर प्रयागपुरा गांव में जाकर छिप गए। इस घटना के बाद वन कर्मचारी तिघरा थाने पहुंचे और पूरा घटनाक्रम पुलिस को बताया। इस पर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर मामले की विवेचना प्रारंभ कर दी है।

 

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सूत्रों के अनुसार खनन माफिया जब वन कर्मचारियों पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर रहे थे। उसी दौरान वन कर्मचारियों के साथ मौजूद एसएएफ के चार जवानों में से एक जवान के हाथ से हड़बड़ाहट में बंदूक (कार्वाइन गन) वहीं कहीं गिर गई। बताया गया है कि घटना के बाद की गई सर्चिंग के दौरान बंदूक जंगल में ही पड़ी मिल गई। हालांकि वन विभाग के किसी अधिकारी ने आधिकारिक रूप से बंदूक गिरने और मिलने के घटनाक्रम की पुष्टि नहीं की है। 





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