Uttarakhand की नई Women Policy से बदलेगी तकदीर, अब Mahila Sabhas से चलेंगी गांव की सरकारें

Uttarakhand First Women Policy
ANI
एकता । Jun 29 2026 11:57AM

उत्तराखंड की धामी सरकार ने ऐतिहासिक 'महिला नीति' को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य महिलाओं को केवल योजनाओं की लाभार्थी बनाने के बजाय रोजगार, नेतृत्व और ग्रामीण विकास की मुख्य धारा में शामिल करना है। इस नीति के तहत ग्राम स्तर पर 'महिला सभाओं' का गठन और सरकारी नौकरियों में 30% आरक्षण जैसे प्रावधान कर महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया जाएगा।

उत्तराखंड सरकार ने राज्य की महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए पहली बार एक खास महिला नीति को मंजूरी दी है। इसका मकसद महिलाओं को सिर्फ सरकारी योजनाओं के भरोसे रखने के बजाय उन्हें रोजगार, व्यापार, नेतृत्व और गांवों के विकास के केंद्र में लाना है। यह नीति ऐसे समय पर आई है जब पूरे देश में महिलाओं के नेतृत्व में विकास करने के मॉडल पर चर्चा हो रही है।

नौकरी, व्यापार और बड़े फैसलों में मिलेगी सीधी हिस्सेदारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लंबे समय से महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाने वाली योजनाओं पर जोर देते रहे हैं। इस नई नीति के जरिए सरकार चाहती है कि महिलाओं का दायरा सिर्फ घर-गृहस्थी या खेतों तक सीमित न रहे, बल्कि नौकरियों, बिजनेस और गांवों के बड़े फैसलों में भी उनकी सीधी भागीदारी हो।

सीएम धामी का विजन

सीएम धामी का कहना है, "महिलाएं उत्तराखंड के समाज की रीढ़ हैं। हमारी सरकार का मानना है कि महिलाओं को मजबूत बनाए बिना समाज आगे नहीं बढ़ सकता। यही वजह है कि हमने महिलाओं के लिए कई खास योजनाएं शुरू की हैं, जो आने वाले समय में बड़ा बदलाव लाएँगी।" सीएम धामी अपने कार्यकाल में महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 30% आरक्षण देने और सहकारी समितियों में भी आरक्षण जैसे कई बड़े फैसले ले चुके हैं।

इसे भी पढ़ें: Uttarakhand: धामी सरकार का मजदूरों को बड़ा तोहफा, DBT से खातों में सीधे भेजे 93 करोड़ रुपये

गांव की सरकार में महिलाओं की सीधी एंट्री, बनेंगी 'महिला सभाएं'

इस नीति का सबसे बेहतरीन हिस्सा ग्रामीण स्तर पर महिलाओं को ताकत देना है। अब तक गांवों के विकास और बजट की प्लानिंग में महिलाओं की बातें अक्सर अनसुनी रह जाती थीं, लेकिन अब इसका पक्का इलाज कर दिया गया है। नई नीति के तहत ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष 'महिला सभाओं' का गठन किया जाएगा। ये सभाएं सीधे गांव के विकास से जुड़े फैसलों में अपनी राय रखेंगी, जिससे प्रशासनिक प्लानिंग में महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता मिलेगी।

नौकरियों और सहकारी समितियों में मिला आरक्षण का कवच

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने के लिए आरक्षण का एक मजबूत सुरक्षा कवच तैयार किया है।

सरकारी नौकरियों में 30% आरक्षण: इस बड़े फैसले से सरकारी सेवाओं में उत्तराखंड की बेटियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे महिलाओं का आत्मविश्वास जागा है और उनके परिवारों को आर्थिक मजबूती मिली है।

सहकारी समितियों में 33% आरक्षण: नौकरी के साथ-साथ अब कॉपरेटिव सेक्टर में भी महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें तय कर दी गई हैं। इसका फायदा यह होगा कि ग्रामीण इलाकों में पैसों के लेन-देन और बिजनेस से जुड़े बड़े फैसलों में महिलाएं अपनी बात मजबूती से रख सकेंगी।

इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi NewsRoom: Arunachal Pradesh में Chinese Army ने की घुसपैठ, जनजाति समुदाय के दावों से उठ रहे कई सवाल

ऑटो चलाने से लेकर ड्रोन उड़ाने तक, हर फील्ड में आगे आ रही हैं महिलाएं

महिलाओं को खुद का काम शुरू करने और कमाई के नए साधन देने के लिए उत्तराखंड सरकार एक पूरा सिस्टम तैयार कर चुकी है। देहरादून से शुरू की गई 'महिला सारथी योजना' के तहत महिलाएं अब सड़कों पर ऑटो-रिक्शा और टू-व्हीलर टैक्सी चलाकर खुद अपनी कमाई कर रही हैं। इसके अलावा सरकार की कई अन्य योजनाएं भी महिलाओं को बिजनेस की दुनिया में आगे बढ़ा रही हैं।

लखपति दीदी योजना: इसके जरिए महिला स्वयं सहायता समूहों को मजबूत कर उन्हें सालाना एक लाख रुपये से ज्यादा कमाने के काबिल बनाया जा रहा है।

ड्रोन दीदी योजना: गांवों की महिलाओं को आधुनिक खेती के लिए ड्रोन उड़ाने और उसकी देखरेख की हाईटेक ट्रेनिंग दी जा रही है।

मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना और एकल महिला स्वरोजगार योजना: ये योजनाएं उन महिलाओं के लिए बड़ा सहारा बनी हैं जो अकेले अपने दम पर छोटा-मोटा बिजनेस या कुटीर उद्योग शुरू करना चाहती हैं।

कुल मिलाकर, उत्तराखंड अब देश के सामने एक ऐसा मॉडल पेश कर रहा है जहां महिलाएं सिर्फ योजनाओं का लाभ लेने वाली नहीं, बल्कि राज्य की तरक्की को आगे बढ़ाने वाली मुख्य ताकत बन चुकी हैं।

All the updates here:

अन्य न्यूज़