एक और चिपको आंदोलन! 500 पेड़ को काटे जाने का उत्तराखंड की महिलाएं कर रही विरोध

Women of Uttarakhand
निधि अविनाश । Mar 18 2021 5:42PM

पेड़ों को बचाने वाली इन महिलाओं का दावा है कि उनका यह जंगल एक देवी मां को समर्पित है और यह पेड़ उनके बच्चों की तरह है। वहीं क्षेत्र की सरपंच कमला मेहता ने बताया कि, हमने किसी को पेड़ काटने नहीं दिया है क्योंकि इनको काटने से पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचेगा।

उत्तराखंड की इस खबर को सुनकर आपको फिर से एक बार चिपको आंदोलन की याद आ जाएगी। जी हां, उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में सड़क निर्माण के लिए 500 पेड़ों को काटा जाना है जिसका जाखनी गांव की महिलाएं पुरजोर विरोध करते नज़र आ रही है। आपको बता दें कि यह महिलाएं चिपको आंदोलन की ही तरह पेड़ों को गले लगाकर खड़ी हो गई है। पेड़ों को बचाने वाली इन महिलाओं का दावा है कि उनका यह जंगल एक देवी मां को समर्पित है और यह पेड़ उनके बच्चों की तरह है। वहीं क्षेत्र की सरपंच कमला मेहता ने बताया कि, हमने किसी को पेड़ काटने नहीं दिया है क्योंकि इनको काटने से पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचेगा। साथ ही हमारे क्षेत्र के प्राकृतिक जल संसाधनों भी नष्ट हो सकते है। 

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विरोध में महिलाओं ने की जमकर नारेबाजी 

आपको बता दें कि गांव की महिलाओं ने मोटर गार्ड निर्माण के विरोध में जमकर नारेबाजी की है। महिलाओं के मुताबिक, पेड़ों की उन्होंने बच्चों की तरह देखभाल की है और इन्हें किसी भी हाल में काटा नहीं दिया जा सकता है। गौरतलब है कि, यह विवाद अब से नहीं बल्कि साल 2009 से चल रहा है। कमेड़ीदेवी-रंगथरा-मजगांव-चौनाला मोटर मार्ग का निर्माण साल 2009 में 2 किलोमीटर लंबी सड़क को बनाने की मंजूरी दी थी लेकिन गांव के विरोध के कारण यह निर्माण शुरू नहीं किया जा सका। 

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