Dadasaheb Phalke Birth Anniversary: एक विदेशी Film देख जागा था जुनून, ऐसे रखी भारतीय सिनेमा की नींव

Dadasaheb Phalke
Creative Commons licenses

हिंदी सिनेमा के पितामह दादासाहेब फाल्के का 30 अप्रैल को जन्म हुआ था। दादासाहेब फाल्के ने भारतीय सिनेमा की नींव रखी थी। फाल्के ने करीब 95 फीचर फिल्में और 26 शॉर्ट फिल्में बनाई थीं।

आज ही के दिन यानी की 30 अप्रैल को हिंदी सिनेमा के पितामह कहे जाने वाले दादासाहेब फाल्के का जन्म हुआ था। फिल्मों के प्रति दादासाहेब फाल्के का जनून इतना जबरदस्त रहा कि उन्होंने फिल्म बनाने की तकनीक सीखने के लिए बीमा पॉलिसी तक गिरवी रख दी थी। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर दादासाहेब फाल्के के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

जन्म और परिवार

महाराष्ट्र में 30 अप्रैल 1870 को दादासाहेब फाल्के का जन्म हुआ था। इनके पिता संस्कृत के बड़े विद्वान थे। दादासाहेब फाल्के बचपन से कला प्रेमी थे। उन्होंने मुंबई के जेजे स्कूल ऑफ आर्ट से पढ़ाई की थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने फोटोग्राफर के रूप में काम करना शुरू किया और बाद में प्रिंटिंग प्रेस भी चलाया। हालांकि उनकी जिंदगी इतनी आसान नहीं थी। उनको कारोबार में नुकसान हुआ और अन्य कई परेशानियों का सामना करना पड़ा।

इसे भी पढ़ें: Satyajit Ray Death Anniversary: वो निर्देशक जिसने Indian Cinema को दिलाई पहचान, ऑस्कर तक पहुंचा जिसका नाम

फिल्म मेकिंग का विचार

दादासाहेब फाल्के की जिंदगी तब बदली, जब उन्होंने विदेशी फिल्म 'द लाइफ ऑफ क्राइस्ट' देखी थी। फिल्म देखते समय उनके मन में यह विचार आया कि अगर विदेशी लोग धार्मिक किरदारों पर फिल्म बना सकते हैं। तो फिर भारत में धार्मिक विषयों और किरदारों पर फिल्म क्यों नहीं बन सकती है। बस यहीं से उन्होंने फिल्मों की दुनिया में कदम रखने का फैसला कर लिया था।

पढ़ाई के लिए गए लंदन

हालांकि उस दौरान भारत में फिल्म बनाना असंभव काम माना जाता था। क्योंकि न किसी को कैमरे की जानकारी थी और न ही फिल्म बनाने की तकनीक का अनुभव था। ऐसे में दादासाहेब फाल्के ने तय किया कि वह इस कला को सीखेंगे। जिसके लिए उन्होंने बीमा पॉलिसी गिरवी रखी और लंदन जाकर फिल्म निर्माण की बारीकियों को सीखा। इसके अलावा वह लंदन से जरूरी उपकरण खरीदकर भारत लाए।

पहली फिल्म

भारत लौटने के बाद दादासाहेब फाल्के ने अपनी पहली फिल्म 'राजा हरिश्चंद्र' बनाना शुरू की। लेकिन सबसे बड़ी परेशानी पैसों की थी। ऐसे मुश्किल समय में फाल्के की पत्नी सरस्वती फाल्के ने अपने पूरे गहने गिरवी रख दिए, जिससे कि फिल्म पूरी हो सके। फाल्के की पत्नी सरस्वती फिल्म की पूरी टीम के लिए खाना बनाती थीं। कलाकारों के कपड़ें संभालती थीं। वहीं वह शूटिंग के हर छोटे-बड़े कामों में मदद करती थीं।

साल 1913 में फिल्म 'राजा हरिश्चंद्र' रिलीज हुई और यह भारत की पहली फीचर फिल्म बनी। इस फिल्म को लोगों का खूब प्यार मिला। इसके बाद दादासाहेब फाल्के ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने 'सत्यवान सावित्री', 'श्रीकृष्ण जन्म', 'मोहिनी भस्मासुर', 'लंका दहन' और 'कालिया मर्दन' जैसी कई सफल फिल्में बनाईं। फाल्के ने करीब 19 साल के करियर में करीब 95 फीचर फिल्में और 26 शॉर्ट फिल्में बनाई थीं।

आखिरी फिल्म

वहीं समय के साथ सिनेमा बदला और मूक फिल्मों की जगह बोलती फिल्मों ने ली। लेकिन फाल्के इस बदलाव के साथ ज्यादा आगे नहीं बढ़ सके। दादासाहेब की आखिरी फिल्म 'गंगावतरण' थी, जोकि साल 1937 में रिलीज हुई थी। इसके बाद उन्होंने फिल्मों से पूरी तरह से दूरी बना ली।

मृत्यु

वहीं 16 फरवरी 1944 को दादासाहेब फाल्के का निधन हो गया था।

All the updates here:

अन्य न्यूज़