आज भी बापू का अहिंसा का रास्ता सबसे प्रासंगिक, सरकारें जनता की आवाज सुनें, राजघाट से बोले सोनम वांगचुक
अपने अभियान की शुरुआत को याद करते हुए वांगचुक ने कहा कि आपको शायद याद होगा कि इसी तरह, जब मैं स्विट्जरलैंड से लौटा था, तो अनशन शुरू करने से पहले हमने राजघाट पर श्रद्धांजलि दी थी और फिर जंतर-मंतर गए थे।



























































