शिवसेना (UBT) सांसदों की बगावत के बीच Uddhav Thackeray बोले: पद छोड़ने को तैयार, पर चोरों को नहीं दूंगा पार्टी

शिवसेना (उबाठा) के 60वें स्थापना दिवस पर, उद्धव ठाकरे ने पार्टी प्रमुख का पद छोड़ने की पेशकश की, यदि सदस्य उन्हें नेतृत्व के अयोग्य मानते हैं। यह पेशकश तब आई है जब नौ में से छह लोकसभा सांसदों ने बगावत कर दी है, कांग्रेस में विलय की आशंका और विचारधारा से भटकने का आरोप लगाते हुए शिंदे गुट के साथ बैठने की मांग की है, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति में दलबदल कानून की सुगबुगाहट तेज हो गई है। ठाकरे ने पार्टी को 'चोरों और लुटेरों' के हाथों में न जाने देने का संकल्प लिया है।
पार्टी के 60वें स्थापना दिवस पर उद्धव ठाकरे ने कहा कि अगर सदस्यों को लगता है कि वह पार्टी प्रमुख के तौर पर नेतृत्व करने के लायक नहीं हैं, तो वह यह पद छोड़ने को तैयार हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जब तक शिव सैनिक उनका समर्थन करते रहेंगे, वह लड़ते रहेंगे, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि पार्टी को 'चोरों और लुटेरों' के हाथों में नहीं सौंपा जाना चाहिए। बालासाहेब ठाकरे के कांग्रेस में शामिल न होने के फ़ैसले का ज़िक्र करते हुए, उन्होंने पार्टी की स्वतंत्र पहचान और इसके स्थापना के सिद्धांतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
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शिवसेना (UBT) के नौ लोकसभा सांसदों में से छह ने खुलकर पार्टी लीडरशिप की बात नहीं मानी है। उन्होंने व्हिप जारी होने के बावजूद मीटिंग्स में हिस्सा नहीं लिया और स्पीकर को चिट्ठी लिखकर अलग ग्रुप का दर्जा मांगा है। उन्होंने कांग्रेस में विलय और विचारधारा से भटकने के डर का हवाला दिया है, साथ ही शिंदे गुट के सांसदों के साथ बैठने की भी मांग की है। जयपुर जाने जैसा यह कदम 2022 में हुई फूट जैसा ही है और अगर दो-तिहाई समर्थन साबित हो जाता है, तो यह दलबदल विरोधी कानून के दायरे में आ सकता है।
चार साल में दूसरी बार अपनी पार्टी में आसन्न टूट पर, ठाकरे ने कहा कि वह एक दशक से अधिक समय से पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं और लगातार हो रहे हमलों को देखते हुए वह शिवसेना (उबाठा) के शीर्ष पद से हटने को तैयार हैं। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ठाकरे मुंबई में शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। भावुक ठाकरे ने अपने समर्थकों से कहा, ‘‘अगर पार्टी का ही कोई व्यक्ति अगला शिवसेना प्रमुख बनता है तो मुझे खुशी होगी, लेकिन मैं इसे चोरों के हाथों में नहीं जाने दूंगा।’’ ठाकरे ने कहा कि वह डगमगाए नहीं हैं और सभी चुनौतियों का सामना करने के लिए डटे हुए हैं।
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उन्होंने कहा कि लेकिन मैं नहीं चाहता कि कोई भी शिवसैनिक मुझ पर उंगली उठाए कि मैंने मुख्यमंत्री पद से (2022 में) इस्तीफा दे दिया और (2026 में) विधान परिषद की सदस्यता जारी नहीं रखी।’’ पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल की घटनाओं से शिवसेना (उबाठा) के कार्यकर्ता निराश नहीं हुए, बल्कि और अधिक जोश में आ गए हैं। उन्होंने बागी सांसदों के उन दावों की कड़ी आलोचना की, जिनमें कहा गया था कि उन्हें आशंका है कि शिवसेना (उबाठा) कांग्रेस में अपना विलय कर सकती है। उन्होंने कहा कि अगर 30 साल तक सहयोगी रहने के बावजूद हमने भाजपा में अपना विलय नहीं किया, तो हम कांग्रेस में विलय कैसे कर सकते हैं? मुझे आशंका है कि भाजपा की महाराष्ट्र इकाई (एकनाथ) शिंदे नीत शिवसेना का (खुद में) विलय कर सकती है।
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