भागवत की नजरों में जेन-जी आंदोलन का दृष्टिकोण
भागवत के इस दृष्टिकोण की सराहना इसलिए भी की जानी चाहिए कि यह केवल किसी एक आंदोलन या किसी एक सरकार का प्रश्न नहीं है। यह भारतीय लोकतंत्र की उस मूल आत्मा को स्पर्श करता है, जिसमें सत्ता जनता से शक्ति प्राप्त करती है और जनता की आवाज सुनना उसकी संवैधानिक तथा नैतिक जिम्मेदारी है।



























































