अक्षय तृतीया पर्व है लोक से लोकोत्तर की दिव्य यात्रा
अक्षय तृतीया का सांस्कृतिक महत्व भी अत्यंत व्यापक है। यह पर्व भारतीय जीवन की उस समन्वयकारी दृष्टि का प्रतीक है, जिसमें भौतिकता और आध्यात्मिकता विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। यहाँ अन्न का भी सम्मान है और आत्मा का भी। यहाँ श्रम का भी महत्व है और ध्यान का भी। यही संतुलन भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता है।



























































