हिंदी भाषा को सियासी नहीं, जमीनी हकीकत के नजरिए से आंकिए
खासकर भारतीय अभिजात्य वर्ग यानी अंग्रेजी दां लोगों के इशारे पर दक्षिण-पश्चिम-पूर्वी भारतीय भाषाओं यथा तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मराठी भाषा-भाषियों में हिंदी के प्रति जो भाषाई सौतियाडाह दिखाई देती है, उससे स्थिति और जटिल हो जाती है।



























































